00:00४४५५५॥
00:14४४५५५ Chyvyan ji,
00:18४५५५५ Swam,
00:21४५५५ Chyvyan ji,
00:23४५५५ ुtra ghandi kya haldvani me rehtet hai,
00:27उनके चलने के रप्तार भले ही कुछ दिमी हो गई
00:30लिगे उनका मन कल्पना के हर उडान उड़ता रहा
00:35इसी उडान में जीवन जी ने एक अनोखी कला को जन्म दिया
00:41नाम रखा बगेट
00:44इसमें वो चीड के पेडों से गिरने वाली सुखी छाल से
00:49सुन्दर कलाकृतियां बनाते हैं
00:52वो च्छाल जिसे लोग आनतोर पर बेकार समते हैं
00:57जीवन जी के हाथों में आते ही तरोहर बन जाती है
01:01उनकी हर रचना में उत्राखन की मिट्टी की खुश्बू होती है
01:06कभी पहडों के लोक बादियंत्र
01:09तो कभी लगता है जैसे पहडों के आत्मा उस लकडी में समा गई हो
01:15जीवन जी का काम सिर्फ कला नहीं एक साधना है
01:20उन्होंने इस कला में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है
01:24जीवन जोसी जैसे कलाकार हमें याद दिलाते हैं
01:29ुपिश्तितियां चाहे जैसी भी हो, अगर इरादा मजबूत हो, तो नामुम्किन कुछ नहीं, उनका नाम जीवन है, और उन्होंने सच में दिखा दिया कि जीवन जीना क्या होता है।
01:59और जीवन जीन जीन जीन जीन पिछले 25-30 साल से काष्ट कला के उपर काम कर रहे हैं, और जिसके चलते आज प्रधामित्र नर्दर मोदी ने इनके नाम को जिक्र किया है, और आज पूरे उत्रा खंड के सांसात हलवानी में भी खुशी किला है, जिससे कि इस गुम्राम कलाका
02:29जीन जीने जो काम किया है, वो मेरे लिए एक असर जनक उपरफदी है, ऐसी उपरफदी की उमिद थी, इतनी जल्दे मिल जाएगी, कहर कर नहीं था, कास कला में मैं तीस-पैंतिस साल से काम कर रहा हूं, और अभी तलक सहसे उस्ता में थी, कि मैं इसको बनाता था, रख दे
02:59मेरे गोरिशंकर कांटपाल जी ने मेरे को रास्ता दिया है, और में दो साल की फेलोष्ट मेली बाद सांस्कृति मतरा है, उसमें काम करने के बाद तिर आगे बढ़ता है लगी हो गया, कई जगे मैंने अपनी एक जुन लगाई है, लकनों में में लगाई है, भोपाल में �
03:29में लगाई है, उस कासकला को मैं आने वाली पीड़ी को सिगा जाओं, ताकि वो कला जीवीत रहे और कुछ रोजगार का उसको देरिया देना चाहता हूं, उसको एक ऐसे मोड़ पर खळा करना चाहता हूं, कि उससे रोजगार जननेट हो जाए, तो इसी प्यास में लगा�
03:59इसके लिए खुशी तो अपार है, किस तरह से उसको व्यक्त करूंगी समझ नहीं पा रहा हूं, क्योंकि सभी जाने वाले सभी लोगों के लगातार फॉन आ रहे हैं, अच्छा लग रहा है, कि यह क्याम हुआ, परिवार के उससे सही रहता है, तो आहां की दिनता निद्ध
04:29सब्सक्राइब करता हूं, कि मुझे एक अच्छा ट्रेणिंग सेंटर खुलने के लिए मुझे साहता दीजे दिया, उसके लिए मैं प्रोजेक्ट बढ़ना के देने को तैयार, प्रोजेक्ट देने के वादा के सथकार में को देजे, तो यह निश्चित तोर पर और गारं�
04:59सब्सक्राइब कर देजाल जीवांचे जोसी के चेहरे पर मुस्कान है और लोग इनको बधायत दोने के लिए पहुंच रहे हैं, भावनत पंडित, E.T. भारत, हल्दवानी