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  • 1 year ago
@Mian Asif Bashir
You must believe that the real joy of life is living in a natural environment, like the natural, indigenous, pure environment of a village.Simple village life of lehanda punjab pakistan.
Natural beauty of village
This video highlights the natural and traditional lifestyle of village life aiming to preserve our cultural heritage and bring public attention to the beauty and simplicity of rural living..

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Transcript
00:00जेलम नदी के दोनों किनारों पर दो महा योध्धा खड़े थे
00:03एक तरफ था सिकंदर, दुनिया को जीतने का सपना देखने वाला योध्धा
00:08दूसरी तरफ था राजा पोरस, अपनी धर्ती और सम्मान के लिए लड़ने वाला
00:14सिकंदर, जो अब तक फारस और मिस्र जैसे बड़े सामराज्यों को अपने घुठनों पर ला चुका था
00:19भारत की ओर बढ़ा, उसकी सेना ने कई स्थानिय शासकों को संधी के लिए मजबूर कर दिया
00:25तक्षिला के राजा ने भी बिना लड़ाई के उसके सामने आत्म समर्पन कर दिया
00:31सिकंदर ने राजा पोरस को संधी का मौका दिया पर राजा पोरस ने उसे ठुकरा दिया
00:35राजा पोरस को अपनी सबसे बड़ी ताकत जेलम नदी पर पूरा भरोसा था
00:40राजा पोरस ने अपनी सेना को नदी के किनारे तैनात कर दिया और धैर्यपूरवक सिकंदर का इंतजार करने लगे
00:47दूसरी तरफ सिकंदर ने जेलम नदी के पश्चिमी किनारे पर अपना शिविर लगाया
00:52उसने ऐसा दिखावा किया जैसे वह मानसून खत्म होने का इंतजार कर रहा हो
00:57उसने तक्ष शिला के राजा ओमफिस से अनाज मंगवाया
01:01जिससे राजा पोरस को यह यकीन हो गया कि सिकंदर जल्द बाजी में नहीं है
01:06लेकिन सिकंदर की असली योजना कुछ और थी
01:09वह गुपचुप अपनी सेना को तयार कर रहा था
01:12उसने फारस और अन्य विजय अभियानों के दोरान जीते गए सैनिकों को मैसेडोनियन शैली में तयार किया
01:18इसके अलावा उसने धनुरधारियों को भी अपनी सेना में शामिल किया
01:22राजा पोरस अपनी तरफ से पूरी तयारी कर रहे थे
01:26उनके पास विशाल रथ थे और धनुरधारी भी शामिल थे
01:29उनका विश्वास था कि जेलम नदी के कारण सिकंदर के लिए हमला करना असंभव होगा
01:35उन्हें यकीन था कि अगर सिकंदर ने नदी पार करने की कोशिश भी की
01:40तो उसकी सेना को नदी में ही खत्म कर दिया जाएगा
01:42सिकंदर जो अपनी चतुराई और रणनीती के लिए जाना जाता था
01:46ने अपने शिविर में सैनिकों को यह यकीन दिलाया
01:49कि वे मौनसून समाप्थ होने तक वही रुकेंगे
01:52लेकिन रात के अंधेरे में उसने एक अलग योजना पर काम करना शुरू कर दिया
01:57यह लड़ाई केवल तलवारों और भालों का टकराव नहीं थी
02:01यह दिमाग और धैर्य की परीक्षा थी
02:04सिकंदर ने महसूस किया कि उसके शिविर में राजापोरस के जासूस हो सकते हैं
02:10इसे ध्यान में रखते हुए उसने चालाकी से भ्रम पहलाने की योजना बनाई
02:14उसने अपनी सेना को बार-बार शिविर के अंदर मार्च करवाया
02:18ताकि यह प्रतीत हो कि वह युद्ध की तैयारी कर रहा है
02:21यह सब राजापोरस को गुमराह करने के लिए था
02:24लेकिन हकीकत में सिकंदर लगातार नदी पार करने के लिए
02:28एक उप्यूक्त स्थान खोजने में जुटा हुआ था
02:31राजा पोरस ने शुरुआत में सिकंदर की हर गतिविधी पर नजर रखी
02:36वह सतर्क थे लेकिन कुछी समय बाद उसने मान लिया
02:40कि सिकंदर या तो ठक कर हार मान लेगा
02:42या मौनसून समाप्थ होने तक इंतजार करेगा
02:45कई दिनों की गुप्त खोज के बाद
02:47सिकंदर ने नदी पार करने के लिए
02:49एक घने जंगलों से घिरा हुआ स्थान ढूंड लिया
02:51जो उसके शिविर से 18 मील दूर था
02:54यह इलाका उसकी योजना के लिए एकदम सही था
02:57उस शाम जब भयंकर तूफान चल रहा था
03:00सिकंदर ने अपनी सेना के साथ चुपचाप अपनी योजना पर काम शुरू किया
03:05सिकंदर ने राजा पोरस को भ्रमित करने के लिए
03:08अपने शिविर में क्रेटरस को परियाप्त सेना के साथ छोड़ दिया
03:12उसने क्रेटरस को सخت आदेश दिया
03:15कि वह नदी पार करने की कोशिश न करे
03:17बलकि ऐसा दिखाए
03:18जैसे पूरा शिविर वहीं डटा हुआ है
03:21इसके साथ ही
03:22सिकंदर ने एक सैनिक को
03:24राजा का वेश धारण कर
03:26शिविर में छोड़ दिया
03:27ताकि राजा पोरस और अधिक भ्रमित हो
03:30खुद सिकंदर ने अपने भरोसे मंद जनरलों के साथ
03:33नदी पार करने की तैयारी की
03:35सिकंदर ने तीन चरणों में
03:37नदी पार करने की योजना बनाई
03:39उसने अपने शिविर के तंबूओं से बेडे बनाए
03:42और सिंधु नदी पार करने के दोरान
03:44ुसकंदर की गई पुरानी नौकाओं का सहारा लिया
03:47लेकिन नदी पार करते समय एक समस्या आ गई
03:50सिकंदर और उसकी सेना सीधे नदी के दूसरी और पहुँचने की बजाए
03:55एक बड़े द्वीप पर पहुँच गई
03:56अब उन्हें वहां से पैदल ही नदी पार करनी पड़ी
03:59जब भोर हुई सिकंदर ने अपनी सेना को दुबारा संगठित किया
04:03उसने अपनी घुडसवार सेना को पैदल सेना के सामने तैनात किया
04:08क्योंकि उसकी पूरी पैदल सेना अभी तक नदी पार नहीं कर पाई थी
04:12सिकंदर को पता था कि राजा पोरस के विशाल हाथियों का सीधा सामना करना खतरनाक हो सकता है
04:19इसलिए उसने पहले अपनी घुड सवार सेना को सुरक्षित रखने की रणनीती अपनाई
04:24राजा पोरस को जैसे ही खबर दी कि सिकंदर ने नदी पार कर ली है
04:28वह समझ गए कि अब टकराव रोका नहीं जा सकता
04:31बिना समय गवाय राजा पोरस ने अपने बेटे को
04:343000 घुड सवारों और 120 रथों के साथ सिकंदर को रोकने के लिए भेजा
04:39युवा और जोश से भरे हुए राजा पोरस के बेटे ने सोचा
04:44कि वह सिकंदर को नदी पार करने के बाद ठकी हुई हालत में पराजित कर देगा
04:49लेकिन यह योजना उलटी पड़ गई
04:51सिकंदर ने तेजी से अपनी रणनीती को लागू करते हुए
04:55राजा पोरस के बेटे और उसकी सेना पर हमला कर दिया
04:58भीशन संगर्ष में राजा पोरस का बेटा मारा गया
05:02घुडसवार और रत बुरी तरह से नश्ट कर दिये गए
05:05जो बचे थे वे हार के साथ राजा पोरस के पास भाग कर लोटे
05:10नदी पार करने के बाद सिकंदर ने बिना अपनी शेश सेना के आने का इंतजार किये
05:15छेह मील का सफर तय किया और राजा पोरस की सेना के करीब पहुँचा
05:19उसके जनरलों ने उसे सलाह दी कि ठकी हुई सेना को तुरंत लड़ाई में न उतारा जाए
05:24सिकंदर इस बाद से सहमत हुआ
05:27उसने अपनी सेना को व्यवस्थित किया और सही समय का इंतजार करने का निर्णय लिया
05:32राजा पोरस ने युद्ध के लिए अपनी सेना को सावधानी पूर्वक तैयार किया
05:37हाथियों को सेना की अग्रिम पंक्ती में तैनात किया गया
05:40पैदल सेना हाथियों के पीछे तैनात थी
05:42जबकि घुरसवार सेना को दोनों किनारों पर रखा गया
05:46सेना के केंदर में राजा पोरस स्वयम अपने विशाल हाथी पर सवार थे
05:51Sikandr نے اپنی Cavalry کو داہینی اور تینات کیا
05:54جبکہ گھڑ سوار دھنوردھاری راجہ پورس کے ہاتھیوں پر تیر برسانے لگے
05:58اسی دوران Sikandr نے سینا کے بائیں اور سے حملہ کیا
06:02جبکہ اس کے جنرل کوئنس نے راجہ پورس کی سینا کی داہینی اور دھاوا بولا
06:07راجہ پورس نے اپنی داہینی اور کی گھڑ سوار سینا کو بلایا
06:11اور Sikandr کے بائیں طرف کے حملے کا سامنا کرنے کے لیے بھیجا
06:14اس کے بعد اس نے اپنے ہاتھیوں کو Macedonian Phalanx کی اور بڑھا دیا
06:19لیکن Sikandr کی پیدل سینا جو اپنی پنکتیوں کو مضبوط بنائے رکھنے کے لیے پرشکشت تھی
06:25پیچھے ہٹنے لگی جس سے ہاتھی اور ادھک بھرمیت ہو گئے
06:30ہاتھیوں پر برستے تیر اور بڑھتے شور نے انہیں گھبرا دیا
06:34بے کابو ہاتھیوں نے راجہ پورس کی اپنی سینا کو کچلنا شروع کر دیا
06:38راجہ پورس سمجھ گئے کہ ستھتی بگڑ رہی ہے
06:42کوئنس نے اسی بیچ راجہ پورس کی سینا کے پیچھے سے چکر لگا کر
06:47ان کے بائیں کنارے پر حملہ کیا
06:49Sikandr کی یوجنا پوری طرح سے سفل ہو رہی تھی
06:53بھارتیہ سینا کے سینک اب بھاگ کر
06:55ندی کے دوسری اور کھڑی
06:57کریٹرس کی سینک کی اور جانے لگے
06:59اس یدھ میں بھارتیہ سینک کو بھاری نقصان ہوا
07:02لگ بھگ بارہ ہزار سینک مارے گئے
07:04دوسری اور Sikandr کی سینک کا نقصان
07:07کیول ایک ہزار سینکوں تک سیمت رہا
07:10پورس اپنے وشال ہاتھی پر سوار
07:13گھائل اور تھکے ہوئے تھے
07:14لیکن ان کی آنکھوں میں ہار کا کوئی نشان نہیں تھا
07:17میدان میں ان کی سینہ بکھر چکی تھی
07:20لیکن پورس نے آتما سمرپن کرنے سے انکار کر دیا
07:23Sikandr جو پورس کے ساحس اور نترتو سے پربھاوت تھے
07:28خود ان کے پاس پہنچے
07:29انہوں نے پورس سے پوچھا
07:31آپ کے ساتھ کیسا ویوہار کیا جانا چاہیے
07:34پورس نے بینا جھجھک اتر دیا
07:37جیسے ایک راجہ کے ساتھ کیا جانا چاہیے
07:40اس ایک واقعے نے Sikandr کو ان کے
07:43ویقتتو اور گریما سے پریچت کرا دیا
07:45نہ کیول انہوں نے پورس کو ان کا راجے واپس دیا
07:48بلکہ انہیں اپنے سامراجے کا مطر اور سہیوگی بنا لیا
07:52ایک شرط رکھی گئی
07:54پورس کو Sikandr کے پرتی نشتھاوان رہنا ہوگا
07:58اس پرکار
07:59جھیلم کی لڑائی کےول Sikandr کی جیت نہیں تھی
08:02بلکہ پورس کے ساحس اور سممان کی کہانی بھی تھی
08:06اس ویڈیو کو دیکھنے کے لیے دھنیوار
08:08ملتے ہیں
08:09اگلی بار
08:09پلیز لائک کریں
08:11شیئر کریں
08:11اور سبسکرائب کریں
08:12جائے ہند جائے بھارت
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