00:00जेलम नदी के दोनों किनारों पर दो महा योध्धा खड़े थे
00:03एक तरफ था सिकंदर, दुनिया को जीतने का सपना देखने वाला योध्धा
00:08दूसरी तरफ था राजा पोरस, अपनी धर्ती और सम्मान के लिए लड़ने वाला
00:14सिकंदर, जो अब तक फारस और मिस्र जैसे बड़े सामराज्यों को अपने घुठनों पर ला चुका था
00:19भारत की ओर बढ़ा, उसकी सेना ने कई स्थानिय शासकों को संधी के लिए मजबूर कर दिया
00:25तक्षिला के राजा ने भी बिना लड़ाई के उसके सामने आत्म समर्पन कर दिया
00:31सिकंदर ने राजा पोरस को संधी का मौका दिया पर राजा पोरस ने उसे ठुकरा दिया
00:35राजा पोरस को अपनी सबसे बड़ी ताकत जेलम नदी पर पूरा भरोसा था
00:40राजा पोरस ने अपनी सेना को नदी के किनारे तैनात कर दिया और धैर्यपूरवक सिकंदर का इंतजार करने लगे
00:47दूसरी तरफ सिकंदर ने जेलम नदी के पश्चिमी किनारे पर अपना शिविर लगाया
00:52उसने ऐसा दिखावा किया जैसे वह मानसून खत्म होने का इंतजार कर रहा हो
00:57उसने तक्ष शिला के राजा ओमफिस से अनाज मंगवाया
01:01जिससे राजा पोरस को यह यकीन हो गया कि सिकंदर जल्द बाजी में नहीं है
01:06लेकिन सिकंदर की असली योजना कुछ और थी
01:09वह गुपचुप अपनी सेना को तयार कर रहा था
01:12उसने फारस और अन्य विजय अभियानों के दोरान जीते गए सैनिकों को मैसेडोनियन शैली में तयार किया
01:18इसके अलावा उसने धनुरधारियों को भी अपनी सेना में शामिल किया
01:22राजा पोरस अपनी तरफ से पूरी तयारी कर रहे थे
01:26उनके पास विशाल रथ थे और धनुरधारी भी शामिल थे
01:29उनका विश्वास था कि जेलम नदी के कारण सिकंदर के लिए हमला करना असंभव होगा
01:35उन्हें यकीन था कि अगर सिकंदर ने नदी पार करने की कोशिश भी की
01:40तो उसकी सेना को नदी में ही खत्म कर दिया जाएगा
01:42सिकंदर जो अपनी चतुराई और रणनीती के लिए जाना जाता था
01:46ने अपने शिविर में सैनिकों को यह यकीन दिलाया
01:49कि वे मौनसून समाप्थ होने तक वही रुकेंगे
01:52लेकिन रात के अंधेरे में उसने एक अलग योजना पर काम करना शुरू कर दिया
01:57यह लड़ाई केवल तलवारों और भालों का टकराव नहीं थी
02:01यह दिमाग और धैर्य की परीक्षा थी
02:04सिकंदर ने महसूस किया कि उसके शिविर में राजापोरस के जासूस हो सकते हैं
02:10इसे ध्यान में रखते हुए उसने चालाकी से भ्रम पहलाने की योजना बनाई
02:14उसने अपनी सेना को बार-बार शिविर के अंदर मार्च करवाया
02:18ताकि यह प्रतीत हो कि वह युद्ध की तैयारी कर रहा है
02:21यह सब राजापोरस को गुमराह करने के लिए था
02:24लेकिन हकीकत में सिकंदर लगातार नदी पार करने के लिए
02:28एक उप्यूक्त स्थान खोजने में जुटा हुआ था
02:31राजा पोरस ने शुरुआत में सिकंदर की हर गतिविधी पर नजर रखी
02:36वह सतर्क थे लेकिन कुछी समय बाद उसने मान लिया
02:40कि सिकंदर या तो ठक कर हार मान लेगा
02:42या मौनसून समाप्थ होने तक इंतजार करेगा
02:45कई दिनों की गुप्त खोज के बाद
02:47सिकंदर ने नदी पार करने के लिए
02:49एक घने जंगलों से घिरा हुआ स्थान ढूंड लिया
02:51जो उसके शिविर से 18 मील दूर था
02:54यह इलाका उसकी योजना के लिए एकदम सही था
02:57उस शाम जब भयंकर तूफान चल रहा था
03:00सिकंदर ने अपनी सेना के साथ चुपचाप अपनी योजना पर काम शुरू किया
03:05सिकंदर ने राजा पोरस को भ्रमित करने के लिए
03:08अपने शिविर में क्रेटरस को परियाप्त सेना के साथ छोड़ दिया
03:12उसने क्रेटरस को सخت आदेश दिया
03:15कि वह नदी पार करने की कोशिश न करे
03:17बलकि ऐसा दिखाए
03:18जैसे पूरा शिविर वहीं डटा हुआ है
03:21इसके साथ ही
03:22सिकंदर ने एक सैनिक को
03:24राजा का वेश धारण कर
03:26शिविर में छोड़ दिया
03:27ताकि राजा पोरस और अधिक भ्रमित हो
03:30खुद सिकंदर ने अपने भरोसे मंद जनरलों के साथ
03:33नदी पार करने की तैयारी की
03:35सिकंदर ने तीन चरणों में
03:37नदी पार करने की योजना बनाई
03:39उसने अपने शिविर के तंबूओं से बेडे बनाए
03:42और सिंधु नदी पार करने के दोरान
03:44ुसकंदर की गई पुरानी नौकाओं का सहारा लिया
03:47लेकिन नदी पार करते समय एक समस्या आ गई
03:50सिकंदर और उसकी सेना सीधे नदी के दूसरी और पहुँचने की बजाए
03:55एक बड़े द्वीप पर पहुँच गई
03:56अब उन्हें वहां से पैदल ही नदी पार करनी पड़ी
03:59जब भोर हुई सिकंदर ने अपनी सेना को दुबारा संगठित किया
04:03उसने अपनी घुडसवार सेना को पैदल सेना के सामने तैनात किया
04:08क्योंकि उसकी पूरी पैदल सेना अभी तक नदी पार नहीं कर पाई थी
04:12सिकंदर को पता था कि राजा पोरस के विशाल हाथियों का सीधा सामना करना खतरनाक हो सकता है
04:19इसलिए उसने पहले अपनी घुड सवार सेना को सुरक्षित रखने की रणनीती अपनाई
04:24राजा पोरस को जैसे ही खबर दी कि सिकंदर ने नदी पार कर ली है
04:28वह समझ गए कि अब टकराव रोका नहीं जा सकता
04:31बिना समय गवाय राजा पोरस ने अपने बेटे को
04:343000 घुड सवारों और 120 रथों के साथ सिकंदर को रोकने के लिए भेजा
04:39युवा और जोश से भरे हुए राजा पोरस के बेटे ने सोचा
04:44कि वह सिकंदर को नदी पार करने के बाद ठकी हुई हालत में पराजित कर देगा
04:49लेकिन यह योजना उलटी पड़ गई
04:51सिकंदर ने तेजी से अपनी रणनीती को लागू करते हुए
04:55राजा पोरस के बेटे और उसकी सेना पर हमला कर दिया
04:58भीशन संगर्ष में राजा पोरस का बेटा मारा गया
05:02घुडसवार और रत बुरी तरह से नश्ट कर दिये गए
05:05जो बचे थे वे हार के साथ राजा पोरस के पास भाग कर लोटे
05:10नदी पार करने के बाद सिकंदर ने बिना अपनी शेश सेना के आने का इंतजार किये
05:15छेह मील का सफर तय किया और राजा पोरस की सेना के करीब पहुँचा
05:19उसके जनरलों ने उसे सलाह दी कि ठकी हुई सेना को तुरंत लड़ाई में न उतारा जाए
05:24सिकंदर इस बाद से सहमत हुआ
05:27उसने अपनी सेना को व्यवस्थित किया और सही समय का इंतजार करने का निर्णय लिया
05:32राजा पोरस ने युद्ध के लिए अपनी सेना को सावधानी पूर्वक तैयार किया
05:37हाथियों को सेना की अग्रिम पंक्ती में तैनात किया गया
05:40पैदल सेना हाथियों के पीछे तैनात थी
05:42जबकि घुरसवार सेना को दोनों किनारों पर रखा गया
05:46सेना के केंदर में राजा पोरस स्वयम अपने विशाल हाथी पर सवार थे
05:51Sikandr نے اپنی Cavalry کو داہینی اور تینات کیا
05:54جبکہ گھڑ سوار دھنوردھاری راجہ پورس کے ہاتھیوں پر تیر برسانے لگے
05:58اسی دوران Sikandr نے سینا کے بائیں اور سے حملہ کیا
06:02جبکہ اس کے جنرل کوئنس نے راجہ پورس کی سینا کی داہینی اور دھاوا بولا
06:07راجہ پورس نے اپنی داہینی اور کی گھڑ سوار سینا کو بلایا
06:11اور Sikandr کے بائیں طرف کے حملے کا سامنا کرنے کے لیے بھیجا
06:14اس کے بعد اس نے اپنے ہاتھیوں کو Macedonian Phalanx کی اور بڑھا دیا
06:19لیکن Sikandr کی پیدل سینا جو اپنی پنکتیوں کو مضبوط بنائے رکھنے کے لیے پرشکشت تھی
06:25پیچھے ہٹنے لگی جس سے ہاتھی اور ادھک بھرمیت ہو گئے
06:30ہاتھیوں پر برستے تیر اور بڑھتے شور نے انہیں گھبرا دیا
06:34بے کابو ہاتھیوں نے راجہ پورس کی اپنی سینا کو کچلنا شروع کر دیا
06:38راجہ پورس سمجھ گئے کہ ستھتی بگڑ رہی ہے
06:42کوئنس نے اسی بیچ راجہ پورس کی سینا کے پیچھے سے چکر لگا کر
06:47ان کے بائیں کنارے پر حملہ کیا
06:49Sikandr کی یوجنا پوری طرح سے سفل ہو رہی تھی
06:53بھارتیہ سینا کے سینک اب بھاگ کر
06:55ندی کے دوسری اور کھڑی
06:57کریٹرس کی سینک کی اور جانے لگے
06:59اس یدھ میں بھارتیہ سینک کو بھاری نقصان ہوا
07:02لگ بھگ بارہ ہزار سینک مارے گئے
07:04دوسری اور Sikandr کی سینک کا نقصان
07:07کیول ایک ہزار سینکوں تک سیمت رہا
07:10پورس اپنے وشال ہاتھی پر سوار
07:13گھائل اور تھکے ہوئے تھے
07:14لیکن ان کی آنکھوں میں ہار کا کوئی نشان نہیں تھا
07:17میدان میں ان کی سینہ بکھر چکی تھی
07:20لیکن پورس نے آتما سمرپن کرنے سے انکار کر دیا
07:23Sikandr جو پورس کے ساحس اور نترتو سے پربھاوت تھے
07:28خود ان کے پاس پہنچے
07:29انہوں نے پورس سے پوچھا
07:31آپ کے ساتھ کیسا ویوہار کیا جانا چاہیے
07:34پورس نے بینا جھجھک اتر دیا
07:37جیسے ایک راجہ کے ساتھ کیا جانا چاہیے
07:40اس ایک واقعے نے Sikandr کو ان کے
07:43ویقتتو اور گریما سے پریچت کرا دیا
07:45نہ کیول انہوں نے پورس کو ان کا راجے واپس دیا
07:48بلکہ انہیں اپنے سامراجے کا مطر اور سہیوگی بنا لیا
07:52ایک شرط رکھی گئی
07:54پورس کو Sikandr کے پرتی نشتھاوان رہنا ہوگا
07:58اس پرکار
07:59جھیلم کی لڑائی کےول Sikandr کی جیت نہیں تھی
08:02بلکہ پورس کے ساحس اور سممان کی کہانی بھی تھی
08:06اس ویڈیو کو دیکھنے کے لیے دھنیوار
08:08ملتے ہیں
08:09اگلی بار
08:09پلیز لائک کریں
08:11شیئر کریں
08:11اور سبسکرائب کریں
08:12جائے ہند جائے بھارت
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