00:00मेरे गाओं में बूड़े किसान दादाजी रहते थे
00:02उन्होंने सही समय पर अपने खेतों में धान वोया
00:06उसमें सही समय पर खाद और पानी डाला
00:08फसल बहुत अच्छी हुई
00:10रात को एक गंदी नाली का चुहा आता था
00:13और फसल को कुतरता था
00:14दादाजी क्रोधे दुए
00:17बोले चुहे तुम मेरी फसल बरबाद करेगा
00:20मैं तेरी बिल को आग लगा के तुम सब को भस्म कर दूगा
00:23ये सुनके चुहे की इज़त को ठेस पॉंच गी
00:26रातो रात उसने सब चुहों को एकठा करके चुहा मीटिंगी
00:29कहा अगर दादाजी इस पिल में आग लगाएंगे तो हम उस पिल में शिफ्ट हो जाएंगे
00:32अपना पेट भरता रहेगा बुड़ा तिल तिल मता रहेगा
00:35दादाजी ओड़ते लेकिन दिमाग से गुड़ते
00:38उन्होंने एक एक करके चुहे की हर बिल में कोईला भर दिया
00:41कोईले पर डीजर डॉल कि इसको आग लगा के हवा मार मार के मार मार के सभी चुहे बुन ना लेकिन
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