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Best Story Of a Dead Women in Grave What She Done in Life



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00:00मुहतरम नाजरीन आज हम आपको एक ऐसा वाक्य सुनाने वाले है कि रमजान के मुबारक महीने में एक नेक औरत जो लोगों के कपड़े सिलाई करके गुजर बसर करती थी, मरने के बाद वह क्यूं अजाब का शिकार हुई, उसकी कब्र का हाल जानकर हर कोई दंग रह गया, क
00:30तौबा अस्तगफार करने पर मजबूर हो गया, लोगों के इसरार पर जब उसका शोहर ने अपनी बीवी की हकीकत बताया, तो यह जानकर सब के रोंगटे खड़े हो गये, मेरे अजीज दोस्तों, इस वाक्य में हमारे साथ आखिर तक जरूर रहिएगा, कहां जाता है कि �
01:00को हर सहूलियत देना चाहती थी, लेकिन उसके हालात उसे इन बातों की इजासत नहीं देते, उसकी सोलह साल की उम्र में शादी हो गई थी, उसका शोहर एक मामूली मुलाजमत करता था, जिसकी बदौलत उनके घर में गरीबी ने डेरा डाल रखा था, जुलेखा अक्सर अ
01:30लेकिन उसका शोहर इतना पढ़ा लिखा नहीं था, और फिर नौकरी के मौके भी कम थे, यही वजह थी कि वह अपनी बीवी से कहता कि मैं बहुत कोशिश करता हूँ, लेकिन कहीं और काम नहीं मिल रहा, मैं कैसे काम ढूंडू, कहां ढूंडू, वह बेबसी से अपना सर थ
02:00घरेलू जगडों से वह तंग आने लगा था, तब ही जुलेखा के घर जब पहली बेटी ने जन्म लिया, तो जुलेखा का दिल उसके साथ पहल गया, और वह महबत से उसके साथ वक्त बिताने लगी, लेकिन जैसे ही बच्ची थोड़ी बड़ी हुई, उसकी जरूरतों न
02:30पूरी करेंगे, आप कोई और काम ढूंड क्यों नहीं लेते, जुलेखा का शोहर जुन्जला जाता और घुस्से में आकर कहता, कि मैं कहां से खर्चे पूरे करूँ, तुम अच्छी तरह जानती हो कि मेरी तंखवाह कितनी है, जो तंखवाह मिलती है, तुम्हारे हाथ पर
03:00अपनी बीवी से कहकर दूसरे कमरे में जाकर सो जाता, जबकि वह सारी रात सोचती रहती और पूट पूट कर रोती रहती, इन्हीं हालात में यास्मीन का दूसरा बच्चा होने वाला हो गया, और अब फिर से उसे इसी बात की परेशानी थी, कि वह सारे खर्चे किस तरह �
03:30से जवाब ही दे दिया था क्योंकि उसका ब्लड प्रेशर बहुत हाई रहता था लेकिन शुक्र है कि जुलेखा और बच्चे की सेहत ठीक रही थी कुछ अरसे तक ऐसे ही गुजर गया जुलेखा अपने दोनों बच्चों के साथ मश्रूफ हो गई बड़ी बेटी अब चार स
04:00थी वह फिर से अपने शौहर के सामने हाथ पहला कर खड़ी हो गई और उससे रकम का सवाल करने लगी जबकि उसका शौहर कहने लगा कि मैं कोशिश करूंगा कि तुम्हें कुछ ज्यादा पैसे दे दू लेकिन तुम जानती हो कि आजकल के रोजगार के क्या हालात हैं अग
04:30अपना दिल मार करर बैठ गई लेकिन उसके दिल में इस बात की बहुत आर्जू थी कि वह अपने बच्चों के लिए कुछ करे उनको बहतर जिंदगी देने के लिए और अच्छा खाना खिलाने के लिए उसे भी कुछ करना चाहिए यही सोच सोच कर जुलेखा परेशान हो
05:00इस औरत के दो बच्चे थे और शोहर के इंतकाल के बाद वह अकेले जिंदगी गुजार रही थी जुलेखा की उसे आते जाते सलाम दूआ हो गई और तब उसे पता चला कि वह औरत घर पर कपड़े सिलाई करती है और इसी से अपनी गुजर बसर करती है उस औरत का नाम र
05:30बहतर जिंदगी गुजार सके यही सोचकर जुलेखा ने राबिया से बात की और कहा मुझे भी सिलाई सिखा दें मैं चाहती हूँ कि मेरे हालाद भी बहतर हो जाएं मेरे शोहर की कमाई में मेरा गुजारा नहीं होता जिसकी वजह से मैं बहुत सारी चीजों के ऊपर अपन
06:00शायद इस तरह मेरी भी मुश्किल आसान हो जाए जुलेखा ने जब राबिया से दरख्वास्त की तो राबिया ने फौरन रजामंदी दे दी और कहने लगी अरे ये तो कोई मुश्किल बात नहीं है तुम रोज मेरे पास आया करो मुझे पूरी उम्मीद है कि तुम जल्
06:30बैठ कर कपड़े सिलाई करती जुलेखा धीरे धीरे काम सीख रही थी और फिर बहुत जल्द उसके काम में बढ़ोतरी आती गई अब तो वह राबिया की मदद के बिना भी सूट सिलने लगी थी जिस दिन उसने पहली बार एक सूट सिलाई किया उस दिन वह बेहत खुश ह
07:00अरे ये सूट सिलकर तुम कितने पैसे कमा लोगी मुश्किल से तुम्हें चंद रुपए मिलेंगे तुम जानती तो हो कि यहां के हालात कैसे हैं हमारे जैसे ही लोग यहां पर रहते हैं जो सिलाई के नाम पर तुम्हें चंद रुपए ही देंगे
07:14जुलेखा के शोहर ने उसका दिल तोड़ दिया जिससे वह चुप-चाप रह गई
07:19लेकिन उसने सोच लिया था कि एक बार हिम्मत करके अपने हालात को बदलने की कोशिश जरूर करेगी
07:26यही सोच कर उसने अब घर में बाकाइदा कपड़े सिलाई करने शुरू कर दिये
07:31शुरुआत में उसे बहुत कम काम मिलता था
07:34लेकिन फिर धीरे धीरे जैसे जैसे उसके काम में सफाई और नफासत आती गई
07:40वैसे वैसे उसे ज्यादा काम मिलने लगा
07:42अब तो जुलेखा बेहद मसरूफ रहने लगी थी
07:46वह कपड़े सिलाई करती और अकसर घर के कामों और बच्चों को नजर अंदाज करने लगी थी
07:51इसी दौरान वह तीसरी बार हामिया हो गई और उसकी तबियत काफी खराब सी रहने लगी
07:57लेकिन इस दौरान भी जुलेखा ने सिलाई का काम नहीं छोड़ा
08:01बलकि वह लगातार कपड़े सिलती रहती और बच्चों को नजर अंदाज करके अपने काम में लगी रहती
08:07तीसरी बार जुलेखा के यहाँ फिर से एक बेटी ने जन्म लिया
08:11और अब जुलेखा बहुत ज्यादा कमजोर हो चुकी थी
08:14लेकिन इस दौरान भी उसने कपड़े सिलना नहीं छोड़ा
08:18जुलेखा की बड़ी बेटी अब बड़ी हो रही थी
08:21बड़े दोनों बच्चे तो स्कूल जाते थे
08:23और उनके सारे खर्च जुलेखा ही उठा रही थी
08:27जबकि उसके शोहर की मामूली सी तनख्वाह में
08:30घर का दो वक्त का खाना पूरा करना ही बहुत बड़ा काम था
08:34राबिया अब यहाँ से जा चुकी थी
08:36क्योंकि इस घर का किराया बढ़ चुका था
08:39और राबिया इतना किराया नहीं दे सकती थी
08:42इसलिए उसने कहीं और एक सस्ता घर किराय पर ले लिया
08:46जुलेखा ने दिन रात मेहनत मजदूरी करके
08:50लोगों के कपड़े सिलाई करके
08:52और कस्ते डाल कर एक छोटा सा प्लॉट खरीद लिया था
08:55उसका इरादा था कि जल्द ही इस पर एक घर तामीर किया जाए
08:59क्योंकि वह किराय के घर से तंग आ चुकी थी
09:02और अब इस जंजट से निजात पाना चाहती थी
09:05क्योंकि उसके बच्चे बड़े हो रहे थे
09:07उनके खर्चे भी उसी हिसाब से बढ़ रहे थे
09:11जुलेखा की आँखों पर अब चश्मा लग चुकी थी
09:14और वह पहले से कमजोर हो गई थी
09:17उसे अपने शोहर से कोई लगाव नहीं रहा था
09:20उसका शोहर भी मेहनत और मजदूरी करके
09:23रात को ठका हुआ आता था
09:25और जुलेखा की थोड़ी सी तवज्जो के लिए तरस्ता था
09:28इसी दौरान रमजान के महीना शुरू हो चुके थे
09:31और तब ही एक दिन ना जाने क्या हुआ
09:34कि जुलेखा की हालत बिगडने लगी
09:36उसका सांस उखडने लगा था
09:38और वह बेहत कमजोरी महसूस कर रही थी
09:41जुलेखा ने अपनी तबियत को नजर अंदाज किया
09:44और मशीन पर बैठ कर कपड़े सिलती रही
09:46लेकिन कुछ ही देर गुजरी थी
09:48कि वह बेचैनी से अपने सीने को मलने लगी
09:51ऐसा लग रहा था जैसे कोई भारी बोज उसके सीने पर रखा है
09:55उसने अपने सीने पर दबाव महसूस किया
09:58तो एकदम घबरा कर उठी
10:00और पानी पीने के लिए किचन की तरफ गई
10:03उसके तीनों बच्चे अंदर कमरे में सो रहे थे
10:06क्योंकि उन्हें सुबह सेहरी के लिए उठना था
10:09जबकि जुलेखा सेहरी तक जागती रहती थी
10:13और कपड़े सिलती रहती थी
10:14उस वक्त जब वह किचन में आई
10:17तो पानी का गिलास हाथ में उठाया
10:19और जैसे ही होटों से लगाया
10:21अचानक उसके हाथों से जान निकल गई
10:24और वह जमीन पर गिर पड़ी
10:25ना जाने कितनी देर तक
10:27वह इसी हालत में पड़ी रही
10:29जब उसके शोहर की आँख खुली
10:31तो वह पानी पीने के लिए किचन में आया
10:34और वहाँ जलेखा को जमीन पर पड़ा देखा
10:36तो घबरा गया
10:37उसने जलेखा को हिलाया
10:39उठाया और आवादें देने लगा
10:42लेकिन जलेखा की रूह
10:44पहले ही अपने आखिरी सफर पर रवाना हो चुकी थी
10:47जलेखा का शौहर बेहत परिशान हो गया
10:50वह सोच भी नहीं सकता था कि जुलेखा अचानक उसे छोड़ कर चली जाएगी। उसने दीवानों की तरह उसे आवाजें दी लेकिन सब बेकार रहा। जुलेखा मर चुकी थी और इस वक्त मरी हुई हालत में किचन में गिरी हुई थी। उसके शोहर ने बहुत मुश्किल से
11:20से रुकसत हो चुकी थी। लेकिन वह इस सच्चाई से अंजान थे। जब उन्होंने अपनी मां को मरा हुआ देखा तो तीनों रोने लगे। तड़पने लगे। मां को याद करके उनके आंसू बहने लगे। चीख पुकार की आवास सुनकर महले वाले भी जाग चुके थ
11:50के काबिल नहीं था। हैरानी हद से ज्यादा थी। जुलेखा के अजीज रिष्टेदारों को खबर दी जा चुकी थी। कुछ ही घंटों में सब लोग जमा हो गए थे। जुलेखा के जनाजे का ऐलान जोहर की नमाज के बाद किया गया था। घर महमानों से भर चुका था
12:20नहीं रोया। वह मेहनत मजदूरी करके अपने शोहर का बराबर साथ दे रही थी। दिन रात सिलाई करती और पैसा पैसा जोडती थी। वहां मौजूद हर औरत की जुबान पर इसी तरह के अलफाज थे। हर कोई जुलेखा को अपने अपने लफजों में याद कर रहा थ
12:50हम दर्दी जता रहे थे। वह सिर जुकाए बैठा था और अपनी गुजरी हुई जिंदगी के बारे में सोच रहा था। तभी जुलेखा को गुसल देने के लिए एक औरत आ चुकी थी और उसे गुसल दिया जा रहा था। गुसल देने के कुछ देर बाद सब को जुलेख
13:20उठाने का वक्त हो गया। चार लोग उसे उठाने के लिए आगे बढ़े जिनमें जुलेखा का शोहर भी शामिल था। लेकिन जैसे ही उन्होंने जनाजा उठाने की कोशिश की वह हैरान रह गये। जनाजा बहुत भारी हो चुका था। ऐसा लग रहा था जैसे हजारों म
13:50की कोशिश की लेकिन फिर वही हुआ। चार पाई अपनी जगह से हिली तक नहीं बलकि ऐसा लग रहा था जैसे बहुत से लोग मिलकर भी इसे नहीं उठा पाएंगे। जुलेखा के शोहर ने बाहर से दो चार और लड़कों को बुलाया और उनसे मदद करने को कहा। वह ल
14:20अब मामला संगीन हो चुका था। वहां मौजूद औरतें आपस में बातें करने लगी। अरे मैयत इतनी भारी क्यों हो गई। क्या जुलेखा इतनी गुनहगार थी कि उसके गुनाहों का बोज उसकी मैयत में शामिल हो गया हो। अब मैयत कैसे उठेगी। हर कोई अपने �
14:50सब के चेहरों पर परेशानी थी क्योंकि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि अब मैयत को दफनाने के लिए कैसे ले जाया जाए। तब ही मजमे में से एक बुजर्ग अल्लह वाला शखस आगे आया। उसने हालात के बारे में पूछा तो जुलेखा के शोहर ने उसे सारी कहान
15:20जिसकी मैत नहीं उठेगी। याद करने की कोशिश करो कि जुलेखा अपनी जिन्दगी में कौन सा ऐसा काम करती थी जिसकी वजह से यह सब हो रहा है। बुजर्ग की यह बात सुनकर जुलेखा का शोहर सोच में पड़ गया। लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आ
15:50की तरफ उन्हें भी इस हालात की कोई समझ नहीं आ रही थी। तब ही कुछ देर सोचने के बाद जुलेखा का शोहर कहने लगा ए अल्लाह वाले नेक बुजर्ग जुलेखा तो बहुत अच्छी थी। घरेलू मामलों में भी ठीक थी। और आजकल वह कपड़े सिलाई करके
16:20था। वह मेरा घर का आधा बोज उठा चुकी थी और मुझे कई परेशानियों से बचा चुकी थी। लेकिन उस उसके अंदर एक बहुत बुरी आदत यह थी जब वह सिलाई करने बैठती थी। तो फिर अगर मैं उसे पुकारता या अपनी किसी जरूरत के लिए उसे कोई
16:50इसी चीज की जरूरत हो सकती है। वह अपने काम में लगी रहती और अक्सर मुझे भुला देती थी। जबसे उसने सिलाई का काम ज्यादा पकड़ लिया था वह मेरे करीब बैठती ही नहीं थी। वह मेरे हक अदा नहीं करती थी बलकि अपनी सिलाई को तरजीह देती थी�
17:20लेकिन वह मेरे पास आती ही नहीं थी। वह अपने काम में इतनी डूबी थी कि उसे यह तक याद नहीं रहता था कि उसका एक शोहर भी है। अब तो बच्चों को भी नजर अंदाज करने लगी थी। बहुत कम वह बच्चों की तरफ ध्यान देती और उनकी बातें सुनती
17:50चुकी थी और अपने काम को ही सब कुछ बना लिया था। जुलेखा के शोहर की यह बातें सुनकर वहां मौजूद कई और आपस में एक दूसरे से नजरें चुराने लगी। उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं आ रहा था कि यह छोटी सी गलती इतने बड़े अजाब का स�
18:20तब ही अल्लावाले बुजर्ग आगे बढ़े और जुलेखा के शोहर के कंधे पर हाथ रखकर कहने लगे बेटा अब वह इस दुनिया से गुजर चुकी है उसने जो कुछ भी किया उसे उसकी सजा मिलेगी। लेकिन इस वक्त मामला यह है कि उसकी तदभीन दफनाने का इ
18:50खुले दिल से उसे माफ कर दो ताकि उसकी मैट को यहां से ले जाकर उसे दफन किया जा सके। वाकई आल्ला ताला उसे उस अमल की सजा जरूर देगा जिसकी वजह से उसने तुम्हे नजर अंदाज किया और अपने शोहर को पूरी तरह भूली गए। अल्ला हवाले बु�
19:20और उसकी अगली मनजिलें आसान करें।
19:23यह कहकर अल्लाह वाले बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए
19:26वहां मौजूद सब मर्दों से कहा।
19:28ठीक है, अब आप लोग मैयत को उठाए
19:31और कब्रिस्तान की तरफ रवाना हो।
19:33पहले तो सब जिजख रहे थे
19:35कि ना जाने अब भी मैयत उठेगी या नहीं।
19:38लेकिन फिर सबने आगे बढ़कर
19:40चारपाई को हाथ लगाया तो वह ऐसे उठ गई
19:43जैसे फूलों जितनी नाजुक हो।
19:46सबने कलमा ए शहादत पढ़ते हुए
19:48कब्रिस्तान की तरफ रुख किया।
19:50सब लोग मैयत को लेकर कब्रिस्तान में पहुँच गए
19:53जबकि कब्र खोद कर मैयत को कब्र में उतरने लगे।
19:57तब ही अचानक उसमें से सांप और बिच्छू निकलने लगे।
20:01तो सब ही लोग बहुत घबरा गए थे।
20:03लोग कहने लगे कि उस पर अल्लाह का दर्दनाक अजब आ गया है।
20:08तो सब लोग ने फैसला किया कि इसको इसी तरह कब्र में दफना दिया जाए
20:12और अल्लाह पाक का और इस ओरत का मामला है।
20:15तब ही सभी लोगों ने जैसे तैसे दफना दिया गया।
20:19और इस औरत के लिए मगफिरत के लिए दुआ करने लगे और सभी लोगों ने अपने अपने घर आ गए।
20:49अलाह का अजाब भी आ सकता है। मेरे माँ बहनों से गुजारिश है कि आप इस गुनाहों से बचना चाहते हैं। तो अभी तौबा अस्तगफार करें। और पांच वक्त की नमाज जरूर से पढ़े। क्योंकि नमाज पढ़ने से हर गुनाहों से बचे रहेंगे। और आप �
21:19पहले अपने फैमिली दोस्तों, रिष्टेदारों में वीडियो को शेयर जरूर करें क्योंकि उन्हें भी इबरत हासिल होगी। और हमारे और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके फैमिली का हिस्सा जरूर बनेगा। शुक्रिया मिलते हैं। अगली वीडियो में तब तक के

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