00:00पसंथि!
00:05मालकिन?
00:06तेरी इतनी हिंम्मद
00:08कि तु मेरे बेस्टेपे सो गई?
00:11माफ कर दीजा मालकिन
00:12हमसे गल्ती हो गई
00:15मैंने तुझे कुछ ज़ादा ही छूट दे दी है न?
00:18नाई मालकीन
00:19माफ कर दीजा
00:20हम कुछू सोचे नहीं
00:24हामरी कमर में तक दायद था कि बिना सोचे ही लेट गए
00:28अच्छा? ऐसा कौन सा काम किया था? जो तेरी कमर में दर्द हो रहा है?
00:34वो मालकिन का है न कि हमारा मरद हमें राद को सोने नहीं देता है
00:39कौन? हरिया? वो शराबी?
00:43जी मालकिन
00:44मतलब खुल के बोल
00:46वो का है न कि हमरा मरद राद पर हमरी जमीन पर हल जोता है
00:53वो खुद तो सोता ही नहीं है और हमें भी सोने नहीं देता है
00:57तो ये तो अच्छी बात है न?
01:01जमीन पर हल चलता रहेगा तो तेरे जमीन की ज़ाड अपने आप साफ होती रहेगी
01:05तुझे साफ सफाई करने की जरूरत ही नहीं बढ़ेगी
01:09मालकिन जाड जाडियां तो साफ हो जाएंगी और घास भी नहीं उगेगी
01:15लेकिन उके बाद हमरे जो बदन में दर्ध होता है उका का
01:19और अब तो देखिये हमसे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहे ठीक से न चला जा रहे
01:24अच्छा अच्छा वो शराबी इतना बड़ा मर्द है क्या
01:36अरे मालकिन कहां बताएं हम तो परिसान ही हो गए है
01:41उका हल तो यह लौकी से भी बड़ा है
01:45ठीक है एक काम कर तू कल दिन में उसे मेरे पास भीष दे
01:51मैं उसे समझा दूँगी हो सकता है फिर तेरे साथ ऐसा ना करे
01:55आपके पास हाँ अब यह छोड़ और जाकर आराम कर
02:01अरे मालकिन थोड़ा सा ही तो बचा है हम काट देते हैं
02:05कोई बात नहीं हम कर लेंगे तू जा अरे मालकिन हम कर लेंगे आप जाके आराम कीजिए ठीक है तुम काटो
02:12कर दो जाके तूड़ा जा आरे मालकिन रिर्ण
02:42वाह, क्या वादियां है
03:06इन वादियों के बीस से जब गाड़ी गुजरे गई तो बड़ा मज़ा आएगा
03:12अरे बसंती
03:18आज खाने खाके आई हो के नहीं
03:22बड़े धीमे धीमे हाथ चलना है तुम्हारे
03:28नहीं न मालिक
03:30सावेरी सुवेरे हमारे मरत से हमारे जगड़ा हो गया
03:34ओहो
03:35ये ले
04:01केला खाले तेरी भूग मिट जाएगी
04:05ये भी ले
04:13अरे नहीं न मालिक आपका एक केला ही इतना बड़ा है कि इसी से हमारे भूग मिट जाएगी
04:20मैं दूसरी केली की ज़रूत नहीं पड़ेगी
04:23खाले खाले ये मेरा केला है जो एक बार खाता है न उसकी सारी भूग मिट जाती है
04:31सई के अरे मालिक आप एक हमारा मरग है जब दे को छोटे-छोटे केली लाता है
04:50अरे बसंथी तू नहीं जानती जिनका छोटा होता है न उन्हें छोटा केला ही पसंद आता है
05:14मालिक हम समझे नहीं इससे उनके अंदर की सभाव का पता चलता है
05:19क्या रहे बसंथी
05:24यहां केला खाने आती है काम करने आती है
05:29नहीं नी मालिक वो तो मालिक हमारे हाथ में केला खावा दिये थे
05:34चुप चाप उपर जा और अपना काम खतम कर जब देखो काम चोड़ी करती रहती है
05:41विकल
05:42और आप
05:48क्या मुख्या आगे दूसरा केला रखके बैठें
05:53तूसरा केला भी उसी के मुँ में देंगे क्या
06:00हमें तो नहीं पकड़ाये कभी केला
06:02अरे ठकराइन
06:03केले तो मैं अपने लिए लाये था
06:06लेकिन बिचारी भूकी प्यासी ठकी हरी काम कर रही थी
06:10इसलिए अपना केला उसको दे दिया
06:13तुम तो बेकार में राई का पहाड बनाने लगती हो
06:16हाँ
06:17हम सब समझते हैं
06:19आज आपको देल नहीं हो रही है
06:22पंचायत नहीं जाना
06:26अले हाँ हाँ जाना है जाना है
06:28आपको बेंदा आपको, लाउीं घापकों करेंदा तुम अभलो
06:35हुआ हुआ हुआ
07:05लो, खाला लो
07:20हालाई
07:22लेजी है
07:35अरे, कहा दर रहे हो
08:00कम से कम खाना तो खा लेते
08:02फूके पेटनी नहीं आएगी
08:04अरे, मेरी रानी
08:06कौन कमबक सोना चाहता
08:08आज तो पुरी राच जागेंगे
08:10पहले ये खाना खालें
08:11बाद में वो खाना खालेंगे
08:13छोड़ो, छोड़ो न�a
08:15हाथ तो धोलो
08:16हाथ तो धोलो, हमें मिर्च लगेगी
08:21मिर्ची फिजो आँसो निकलते हैं न
08:24उसे मिर्ची सुख कहते हैं
08:26और आज मुझे मत रुको
08:27मिर्ची सुख का अनन लेने दो
08:29क्या हुआ आप
08:32क्यो धक्का दे रही हो
08:34तुम्हें तो मज़ा आ रहा है
08:37पर हमरी तो हालत खराब हो रही है न
08:39ज्यों
08:40एक बार उचल कुद मचानेक बाद तो माउट हो गई
08:43फिर से तुम्हारा पाने निकल गया
08:46तुम्हारा तो बल्ला जब चालू होता है न एक बार
08:48तो शान्त होने का नाम नहीं लेता
08:50लेकिन हामरी तो
08:51हालत खराब हो जाती है तो हमें केच आउट होना पड़ता है
08:55तुम ना कभी मुझे सेटिस्फाई नहीं कर पाऊगी
08:59सोव अके लिए तुम
09:00चलो चाओ आज तो हमारी हरिवरी जमीन पर
09:12कम से कम ये शाराबी रेगिस्तान तो नहीं बना पाएगा
09:16आराम से सोएंगे अब
09:25कमर
09:39कमर
09:41कमर
09:53कमर इतना दर्द कर रहा है
09:58मालकिन भी नहीं है ऐसे मैं
10:00कमर सीधी कर लेते हैं
10:09कसंती
10:14मालकिन
10:15तेरी इतनी हिम्मत
10:17कि तुम मेरे बेस्तर पेस हो गई
10:19माफ कर दीजे मालकिन हम से गलती हो गई
10:22मैंने तुझे कुछ जादा ही छूट दे दी है न
10:26नहीं नहीं मालकिन
10:27माफ कर दीजे वह मालकिन
10:29हम कुछ उचे नहीं
10:31हमरी कमर में तक दर्द था कि बिना सोचे ही लेट गए
10:36अच्छा
10:37ऐसा कौन सा काम किया था जो तेरी कमर में दर्द हो रहा है
10:41जो तेरी कमर में दर्द हो रहा है
10:43मालकिन का है न कि हमरा मरद हमें रात को सोने नहीं देता है
10:49कौन हरिया वो शराबी
10:52जी मालकिन
10:53मतलब खुल के बोल
10:56वो का है न कि हमरा मरद रात पर हमरी जमीन पर हल जोता है
11:02वो खुद तो सोता ही नहीं है, और हमें भी सोने नहीं दिता है
11:06तो ये तो अच्छी बात है ना
11:09जमीन पे हल चलता रहेगा, तो तेरे जमीन की जाड अपने आप साफ होती रहेगी
11:14तुझे साफ सफाई करने की जरुरत ही नहीं बढ़ेगी
11:18मालकेन जार जाडियां तो साफ हो जाएंगी और घास भी नहीं उगेगी
11:24लेकिन उके बाद हमरे जो बदन में दर्ध होता है उका का
11:28और अब तो देखिये हमसे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा है ठीक से न चला जा रहा है
11:33अच्छा
11:36अच्छा वो शराबी इतना बड़ा मर्द है क्या
11:45अरे मालकेन कहां बताएं हम तो परिसान ही हो गए है
11:50उका हल तो यह लौकी से भी बड़ा है
11:54ठीक है एक काम कर तू कल दिन में उसे मेरे पास भीश दे
12:00मैं उसे समझा दूँगी हो सकता है फिर तेरे साथ ऐसा ना करें
12:04आपके पास हाँ अब यह छोड और जाकर आराम कर
12:10अरे मालकेन थोड़ा सा ही तो बचा है हम काट देते है कोई बात नहीं हम कर लेंगे तू जा
12:16अरे मालकेन हम कर लेंगे आप जाके आराम कीजिए ठीक है तुम काटो
12:46ठाकुर साब उठिये ठाकुर साब उठिये आपके लिए दूद लेकर आये हैं
13:06ète ठाकुर साब उठिये गरम दूद लाये हैं आपके लिए छुवारे वाला
13:10साला मेरी सिंटगी खराब हो गई
13:23पता नहीं इनको क्या हो गया है
13:27सारी सारी राच सोरते रहते
13:28मेरी तरफ तो देखते ही नहीं है
13:31अब इनको कौन बताए
13:34कि हमारा कितना मन करता है
13:36कि हमारी खेती पे भी कोई जदाई करे
13:39अब इनको कौन समझाए
13:41पड़े-पड़े ये खेत बंजर हो गया
13:44अरे मालकीन का बताएं
13:54हम तो परिसान ही हो गए है
13:55उनका हल तो ये लौकी से भी बड़ा है
14:09पेव को फौरत सारी लौकी काटके चले गए
14:20मैंने बसंती को बोला भी था
14:22कि लौकी पूरी मत काटना
14:24अब क्या करूँ
14:39आज काजर से ही काम चलाते हूं
14:48काजर भी तो पेट के लिए लाबदायक होता है
15:05आज से पहले मेरे दमाग में बात क्यों नहीं आई
15:07जब काजर में इतना स्वाद है तो लौकी में कितना होगा
15:12कितनी किस्मत वाली यह बसंती जो उसके पास अरिया है
15:15हाई अरिया
15:17आज आज
15:19आज
15:20आज
15:21आज
15:22आज
15:33अरे राद को सोने से पहले कपड़े कहां पहन रही हो
15:54उतारने में टाइम लगेगा
15:56दारेक बल्ले बाजी शुरू करते हैं न
15:59इस अपने बल्ले को न तुम तनिक काबू में रखा करो
16:03हमको नो मैदान नहीं है जब देखो बल्ले बाजी करने चले आते हो
16:08इंसान की जब भूग घर में नहीं मिटती है न
16:16तो बाहर तलाश करता है बाद में हम पर कोई इलजा मतलग आना
16:21इंसान नियत पर निर्भर करता है तुम तनिक हमरे बारे में भी तो सोचा करो
16:27एकाथ दिन का हमें भी मौका दिया करो आराम करने का
16:30आदमी शादी कहाए करता है
16:33ताकि जब मन करे वो समुन्दर में तैर सके
16:40तेरना तो दूर की बात है, तुम तो तरंगे ने उठने दिती हो
16:45का टुकर टुकर देख रहे हो
16:51तुमसे कछु बचा है का?
16:55कुछ जादा ही तुमारी चुबान ने चल रही आज कर
16:57टेम से सोजो, कल मालकिन के पास चले जाना, बुलाया है तुम्हे
17:03मालकिन, मालकिन ने क्यों बुलाया मचा
17:06उन्हें तुमसे कछु बात करनी है, और हाँ, इननसे मधुतों के मच जाना
17:12तुम्हें तुम्हें कछु नहीं हो सकता
17:33तुम्हें तुम्हें
18:03अरे हरिया
18:21तुमा गए
18:25जी मेल गिन
18:27आओ
18:29बेटो
18:33बेटो
18:37मालकिन
18:40यहां कैसे बेट सकते हैं
18:42यहां पे तुमालिक बेटते हैं
18:43मालिक के चिंता तुम मत करो
18:45हम कह रहे ना बेटो
18:46नहीं नहीं मालकिन
18:48मालिक को बता चलो तो हमें बहुत डाटेंगे
18:49और नौकरी से भी निकाल देंगे
18:51हमने कहा ना मालिक को हम समाल लेंगे
18:54पैटो जुपचाब
18:55जी मालकी
19:16पसंती बता रही थी कि तु उसे बड़ा परिशान करता है
19:20पूरी पूरी रात सोने नहीं देता
19:24अरे नहीं मालकीन वो बहुत जुट बोलती है
19:26उसने मेरी जिन्दगी खराब करके रख दी है
19:31अच्छा
19:34मालकीन अपने हाथ नहीं दोया
19:36मिर्ची आँखों में लगेगी
19:38अरे हरिया
19:40तुझे नहीं पता
19:46मिर्ची लगने के बाद जो आँखों निकलते है
19:50उसे मिर्ची सुक कहते है
19:53हाथ तो धोलो मिर्ची लगेगी
19:58मिर्ची से जो आँशों निकलते हैं उसे मिर्ची सुक कहते है
20:05मिर्ची सुक का आनन लेने दू
20:06सही समझा तुँ हरिया
20:13मिर्ची वाला सुक
20:15अच्छा सुन
20:16मैंने सुना है
20:19तु बसंती को बड़ा दर्द देता है
20:21रुपता ही नहीं है
20:23क्यासी बाते करें मालकीन आप
20:26ऐसी कुछ भी नहीं है
20:27वो जूट बोलती है
20:28मुझे से जूट मत बोल
20:31मुझे सब पता है
20:33और तु
20:35इतना शर्मा क्यों हो रहा है
20:38नहीं
20:40सुना है
21:07तेरे हल में बहुत तम है
21:09सुखी से सुखी जमीन को भी जोटकर
21:13मुलाइम बना देता है
21:14मालकीन
21:16वो तो अपका खिच जोटने के बादी पता चलेगा
21:19कि मुलाइम हुआ की नहीं आपका की
21:21मालकीन नहीं
21:24पसंती बोल पसंती
21:25ऐसा हल चला की
21:27मेरी जमीन की सारी खास फूस खतम हो जाए
21:29हो, हो, हो
21:40आज wins
21:50अरे मालिक इन एक कर रहेंगे आप
22:19मालिक देखेंगे थमें बहुत मारेंगे
22:21हम इन आकरी से निकाल देंगे
22:22ठाकुर की चिंता तुम मत करो
22:25उनी की वज़ा से एक खेत कबसे बंजर पड़ा हुआ
Comments