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कुल्लू ( हिमाचल) – हिमाचल प्रदेश में इन दिनों फागली उत्सव की कुल्लू के आसपास के क्षेत्रों में धूम मची हुई है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इस फागली उत्सव को अलग तरीके से मनाया जाता हैं। जिला कुल्लू के गांव रूमसू में भी फागली उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान रूमसू गांव में फागली उतसव में मुखौटा नृत्य मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहा। देवता द्वारा चुने हुए लोगों ने मुखौटा पहनकर नृत्य कर प्राचीन देव परंपरा का निर्वहन किया। इस नृत्य को देखने के लिए भारी संख्या में लोग गांव में पहुंचे । फागली उत्सव में होने वाले मुखौटा नृत्य की मान्यता है कि प्राचीन समय में यहां पर एक टुंडा नामक राक्षस का राज हुआ करता था और काफी शक्तिशाली माना जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए सभी जमलू ऋषि के पास गये। जमलू ऋषि ने इस समस्या का एक समाधान खोजा। गांव की एक टिंवर छाचक कन्या जो अत्यंत सुन्दर थी जिसे देखकर कोई भी उसके प्रेम में पड़ जाता था। देवता जमलू ने गांव वालों से कहा कि वो राक्षस के समक्ष उस कन्या से विवाह का प्रस्ताव रखे और बदले में शर्त रखे कि वो बिना कोई नुकसान किए कन्या को लेकर वहां से चला जाए । गांव वालों ने वैसा ही किया । राक्षस कन्या के रूप पर मोहित हो गया और गांव के लोगों की शर्त स्वीकार कर ली । देवता जमलू ने कन्या के त्याग भाव को देखते हुए कहा कि अब से हमेशा उसके सम्मान में यह उत्सव मनाया जाएगा और विशेष पकवानों के साथ उसका स्वागत किया जाएगा। फिर धूमधाम से उसकी विदाई की जाती है । तभी से यह उत्सव मनाया जाता है ।

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