नाहर शिव और पार्वती का फोटो फ्रेम लेता है, लेकिन उसकी पेंटिंग अधूरी होती है। वह नकली रूही से पूछता है कि वह इसमें क्या बनाने वाली थी, लेकिन वह कुछ नहीं कहती। जब नाहर पेंटिंग निकालता है, तो असली रूही इसे देखकर भावुक हो जाती है और बताती है कि यह सच्चे प्यार का प्रतीक है। वह नाहर के साथ अपने खास पल को फिर से महसूस करती है, जिससे उसकी भावनाएँ और गहरी हो जाती हैं।
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