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लखनऊ: यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष और बीजेपी की नेता अपर्णा यादव ने कहा कि मैं सबको यही कहती हूं इस पद पर जब मैं नहीं भी आई थी तब भी कहती थी और अब भी कह रही हूं कि समाज में जो कुरीति है महिलाओं के प्रति वो बहुत पहले से चली आ रही है। समाज मॉडर्न न बनकर और ज्यादा दमनकारी बनता जा रहा है। सरकार एक सीमा तक अपना काम कर सकती है पर समाज में जागरूकता लेकर आनी होगी को महिलाएं सिर्फ दमनकारी चीजों के लिए नहीं है महिलाएं भी उतनी ही सार्थक हो सकती हैं समाज में जितना कि पुरुष वर्ग हो सकता है। कोलकाता रेप केस समेत पश्चिम बंगाल के मामलों पर भी अपर्णा यादव ने सख्त कार्रवाई की बात कही। इसके अलावा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर राहुल गांधी के विवादित बयान को लेकर अपर्णा यादव ने कहा कि पहली बात तो ये कि उन्होंने कार्यक्रम का निमंत्रण अस्वीकार क्यों किया क्योंकि उनकी जो ये कार्यशैली है वो छिपे नहीं है किसी से देश में। वो कुछ भी कर सकते हैं, राम मंदिर के उस भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री जी उन श्रमिकों से मिले जिन्होंने उस भवन को बनाया है, उनके ऊपर पुष्पवर्षा की। मैं उनसे निवेदन करना चाहती हूं कि राम एक आस्था का विषय हैं। आदर्श हमारा राम हैं, भारत का चरित्र राम हैं उस पर आक्षेप न करें।

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Transcript
00:00मैं सबसे पहले सबको यही कहती हूँ इस पद पे मैं नहीं आयी थी तब भी यह कहती थी
00:05अब मैं इस पद पे हूँ मैं तब भी यह कह रही हूँ
00:08कि समाज में जो कुरीती है महिलाओं के प्रती वो आज से नहीं बहुत पहले से चली आ रही है
00:14और जिस तरह से समाज हम कहे तो रहे हैं कि मॉर्डन बन रहा है
00:19पर मॉर्डन ना बन करके वो और ज़्यादा मुझे लगता है दमनकारी बनता जा रहा है
00:24और मैं इसका जो है रिसर्च कहती है कि पहले जो अपराद होता है
00:29उसकी जो पहली सीड़ी होती है वो पश्मों से शुरू होती है फिर वो बच्चों पे आती है फिर वो महिलां पे आती
00:35उसके बाद एक हैवानियत का रूप ले लेती है जिसको हम बहुत बड़ा जगन्य अपराद कहते हैं
00:40या मरदर कहते हैं ढकैती कहते हैं चोरी कहते हैं और भी जगन्य अपराद होते हैं जिनका जो है कई प्रकार से आई पीसी की धाराऊं पे विवरण हैं
00:49मैं समझती हूँ कि सरकार एक सीमा तक अपना काम कर सकती है पर समाज में हमें या जागरुक्ता लेकर आनी पड़ेगी कि महिलाएं सिर्फ जो है जो है आपके दमन कारी चीजों के लिए नहीं है महिलाएं उतनी ही मैं समझ सकती हूँ सार्थक हो सकती है समाज में जितना कि �
01:19अब आपके पास भी�� ज़या तर जो केसं when she saw a domestic वीलंस के हैं
01:26वो जदधतर डावरी के हैं तोई से करना पड़ेगा न की था हमारे घर तो गर्ण लेकर नहीं
01:34कोई cabinet minister या कोई महिला आयोग नहीं है
01:37घर के अंदर तो पती है, पत्नी है, बीवी है
01:41और बेहन है, मा है, सास है, नन्ध है, भोजाई है
01:46ऐसे ही रिष्टे हैं न हमारे हाँ
01:48तो हमारे समाज में कुरीती आई है
01:50ये हमें देखना पड़ेगा
01:52बच्चियों को आज हम हरला शर्णाले में हैं
01:55डेस्टिट्यूट बच्चे हैं
01:56बच्चे छोड़के चले जा रहे हैं
01:57बेटियां हो रहे हैं तो उनको छोड़के चले जा रहे हैं
01:59तो कई तरेके से
02:01प्रदान्मंतिरी जी ने कई बार अपने बड़े भाषनों में भी
02:04यह बात का उद्भूदन दिया है
02:06कि बेटी को हमें आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए
02:09बेटियों के लिए, बच्चियों के लिए, महिलाओं के लिए, विमेन एम्पावर्मेंट के लिए
02:14पहली बार पालेमेंट बनी, 33 प्रतिशत का आरक्षन दिया
02:17तो यह पहली बार हुआ
02:19विबक्षी शोर मचाते रहे गए
02:21कि ये करिये, ये ना करिये, ये ऐसे होगा, ये वैसे होगा
02:25मगर धडले से बिल पास हुआ
02:26तो आप कुछ नहीं कह पाए, तो मूँ बंद हैं उनके
02:30मैं समझती हूँ कि सिर्फ कहने से नहीं, करने से होगा
02:34और जो है समाज को भी अपनी नेथिक जिम्मेधारी लेनी पड़ेगे
02:38हम लोग जिस पद पर हैं, हम लोग जिस हैसियत में हैं
02:41जिस तरह से हम लोग अपना काम करना चाहते हैं, उसमें समाज की बड़ी भूमिका होगी
02:46और हम इसको नजर अंदास नहीं कर सकते
02:49कि जो है समाज को हम अलूफ नहीं रख सकते
02:52सिर्फ सरकार के भरोसे हम अपनी बच्चियों को चोड़ दें
02:55ये भी अच्छी बात नहीं है, समाज को भी अपनी जिम्मेधारी लेनी पड़ेगी
02:59मैं समझती हूँ, देखें, बार-बार मैं यही कहोंगी कि यह विक्षिप्त मांसिक्ता का यह कृत्य है
03:05यह कोई व्यक्ति, कोई गवर्मेंट तो नहीं यह कहती है, कोई स्कूल में नहीं सिखाया जाता है
03:11पर यह हमारे परिवारिक संसकार होते हैं
03:14कि आप किस तरह से उठ रहे हैं, बैट रहे हैं, अपने कर्तव्यों का निर्वाहन कर रहे हैं
03:19यह आपको आपका परिवार सिखाता है
03:21मैं यह समझती हूँ कि इसपे स्ट्रिक्ट आक्शन होना चाहिए, यह सरकार का काम है
03:26आर्जी कर केस में भी, या जो है इस तरीके के केसे में भी
03:31सरकार अपनी भूमिका निभाए, पुलिस अपनी भूमिका निभाए, जो कि निभाती भी है
03:36जहाँ पर कमी हो, वहाँ पर महिला आयोग जैसी जो संस्थाय हैं सरकार की, वो अपनी भूमिकाई निभाए
03:42और सब के करने से मुझे लगता है महिलाओं का उठान हो
03:46कारे कल्प कारे शैली कारे कल्प कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे शैली कारे �
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06:46आप मान जनक राजनीत करना चाहते हैं तो वो किसी पे भी टिपनी करें
06:51अरे भगवानी मिला है क्या तुमको
06:53खुद तो त्रिपुंड लगा करके आप घूमते हो
06:55खुद आप अस तरीके का आच्रण करते हो
06:58तो आप खुदी एक मैं समझती हूँ कि
07:02बड़ी अजीबो गरीब उनकी मांसिक कुछ परिस्तिती है
07:08देश उनको माफ नहीं करेगा
07:11और मैं समझती हूँ कि उनको माफी मांगनी चाहिए इस बात पर
07:15मैं बस इतनी बात कहूँगी कि जो इसने भी यहाँ मिलावट करी है
07:20तिरुपती जी के प्रशाद में
07:23उसको कड़े से कड़ा दंड मिलना चाहिए
07:26क्योंकि यह सभी सनातन जो मांते हैं
07:30उनकी आस्था, उनकी संसकार पर यह बहुत बड़ा ठेस पहुचा है
07:36और इस तरीके का कृत्य करना
07:39मुझे नहीं लगता कि यह किसी भी तरीके से उचित है
07:45क्योंकि प्रशाद में मिलावट करना वो भी इस तरीके का, निम निस्तर का
07:49यह बहुत गलत काम करता है
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