00:00काम करना चाहती हूँ
00:02चुड़िया अगर ऐसे ही हालात है तो क्या जरूरत है अपनी बेटी को कॉलिज पढ़ाने की
00:08उसे भी कहीं काम पर लगवाओ और अराम की जिन्दगी गुजारो
00:12नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती
00:15गुड़िया के पापा की इच्छा थी के गुड़िया पाण लिक्कर आगे बढ़े
00:19मैं अपनी बेटी को अपनी आखरी सांस तक पढ़ाओंगी
00:23ऐसे मा चुड़िया गोरी कवी के घर में काम पर लग जाती है
00:27ममा चुड़िया सारा सारा दिन काम करती
00:31और फिर शाम के बाद जाकर अपने घर के काम कर लेती
00:35अपनी बेटी के लिए खाना बनाती और घर की देखभाल करती
00:40अब ममा चुड़िया के पंखों में भी इतनी ताकत नहीं बची थी
00:44वो बहुत कमजोर हो गई थी
00:47ममा चुड़िया सारी सारी रात जाग कर गुजारती
00:51और सारा सारा दिन काम करती
00:54गुढिया पार लिख जाती है
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