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Cricket Trivia: The story of Digvijaysinhji Ranjitsinhji Jadeja and his association with Poland
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Sports
Transcript
00:00आपको याद होगा हाल ही में PM नरेंदर मोधी पोलेंड के दौरे पर गए थे
00:04और इस दौरे की चर्चा भारत-पोलेंड के संबन्धों की एक मजबूत कड़ी के तौर पर हुई।
00:10भारत और पोलेंड के राजनाइक संबन, Diplomatic Relations, 1954 में शुरू हुए थे
00:15जिसके बाद दोनों देशों की Embassy's एक दूसरे की देशों में खुलीं।
00:18लेकिन आप पूछेंगे इसका क्रिकेट से क्या कनेक्शन है।
00:21कनेक्शन है और बड़ा फिल्मी कनेक्शन है।
00:24बड़ी दिल्चस कहानी है।
00:26पूर्व महराजा जाम सहब दिग्विजय सिंगजी रनजीत सिंगजी के स्मारक पर श्रधानजली से की।
00:30यह दिग्विजय सिंगजी रनजीत सिंगजी और कोई नहीं
00:34इंग्लेंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले हमारे पहले क्रिकेटर रनजी
00:39जानी के केस रनजीत सिंगजी के भतीजे थे और रनजी के बाद वो ही जामनगर के महराजा बने थे।
00:45जीहां रनजी ट्रोफी वाले रनजी।
00:47लेकिन रनजी की तरह उनके भतीजे क्रिकेट को जाधा समय नहीं दे पाए।
00:52लेकिन दिगविजय सिंगजी रनजीत सिंगजी का क्रिकेट कनेक्शन यहीं खत नहीं हुआ।
00:561928 में BCCI की स्थापना हुई और उसके बाद समय नहीं दे पाए।
01:00इसके बाद क्रिकेट को जाधा समय नहीं दे पाए।
01:03लेकिन जाम सहाब दिगविजय सिंगजी रनजीत सिंगजी का क्रिकेट कनेक्शन यहीं खत नहीं हुआ।
01:06लेकिन जाम सहाब दिगविजय सिंगजी रनजीत सिंगजी का क्रिकेट कनेक्शन यहीं खत नहीं हुआ।
01:09लेकिन जाम सहाब दिगविजय सिंगजी रनजीत सिंगजी का ऐसा क्या योगदान है जिसकी वज़ा से उनका समारक पॉलेंड के वार्सोर शिर्फ के लिए जाम सहाब दिगविजय सिंगजी रनजीत सिंगजी का क्रिकेट कनेक्शन यहीं खत नहीं हुआ।
01:40आपको स्टीवन स्पील्बर्ग की अवार्ड विनिंग फिल्म शिंदलर्स लिस्ट याद हैं।
01:44यह कहानी थी एक जर्मन उद्योगपती ओसकर शिंदलर की जो बड़ी मुश्कल से बहुत से पॉलेश यहुदी शरणार्थियों को बचाता है।
01:53महाराजा जाम सहब का योगदान भी कुछ-कुछ ओसकर शिंदलर जैसा ही था।
01:59प्रहास में दर्ज है कि 1942 में दूसरे वर्ल वार के दोरान महाराजा रशा से वार के वीच से बहुत बुरी हालत में लोट रहे पॉलेंड के भूके महिलाओं और बच्चों को बचा कर जामनगर लिया थी।
02:12यह वो समय था जब कोई और देश इन महिलाओं और बच्चों को शरण नहीं दे रहा था।
02:17महाराजा जाम सहब दिगविजय सिंग जी रजीस सिंग जी ने इन लोगों के लिए जामनगर के करीब बालचारी नाम के गाउंओं में रहने का इंतिजाम किया।
02:26इन्हें ना सिर्फ एक अच्छी जिंदिगी दी बलके एक हजाद से जादा बच्चों के लिए पॉलिश चिल्डरं केंप लगाया जहां उन्हें अपने देश की पढ़ाई मिली।
02:34आगे का काम भी उन्होंने अधूरा नहीं छोड़ा।
02:36सालों बाद जब हालात समान्य हो गए तो ये लोग जिस देश भी जाना चाते थे वहाँ जाने का इंतिजाम महाराजा ने किया।
02:44उस दोर में कहा जाता था कि उन्होंने भारत में एक छोटा पॉलिंड बसा दिया है।
02:49लेकिन शिनलर्स लिस्क की तरहा जाम सहाब की पॉलिंड के इन बच्चों और महेलाओं को शरण देने की उन्हें बसाने की चर्चा जाधा नहीं हुँ।
02:58उनकी बायोगरफी लिखने का प्रोजेक्ट इतिहासकार एंड्रियू मुर्टैग ने लिया और तब जाकर उन्हें भारत के ओस्कर शिनलर्स के नाम से संबोधित किया गया।
03:07लेकिन पोलेंड ने उनकी इस योगदान को कभी भुलाया नहीं। वो आज भी महाराजा दिगविजय सिंजी रजीस सिंजी को प्यार और सम्मान के साथ याद करते हैं।
03:16महाराजा के नितन के बार एक क्रॉसिंग को उनका नाम दिया, उनके सम्मान में वार्सौ में एक स्मारक बनाया और उनके नाम पर एक स्कूल भी है।
03:24इसके अलावा उन्हें पोलेंड के कमांडर क्रॉस अव दे ओडर अफ मेरिज से भी सम्मानित किया गया।
03:30कितना बड़ा योगदान था जाम सहाब का हाला की हॉलिवूट की शिनलस लिस्ट की तरह इस कहानी पर कोई फिल्म नहीं बनी। लेकिन आर्डिया बुरा नहीं है। अक्षय कुमार कर सकते है।

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