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  • 2 years ago
Chidiya-OR-Kauwaye Kahani Cartoon New Rano Chidiya Wala Cartoon Hindi Achi Kalu Chidiya Ghar - 720

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Transcript
00:00पापा हमें आपकी बहुत आदाईगी, पापा जल्दी वापिस आजाएगा, पापा जो वापिस आएगे तो मेरे लिए गुरिया और खिलोने लेकर आना
00:16ठीक है बेटा, मैं तुम दोनों के लिए ठीर सारे खिलोने लाऊगा
00:19मा बेटियों की बातें खतम हो जाएं तो मुझे से भी मिल लेना
00:23अच्छा मा जी, मैं चलता हूँ, मा जी, मेरी बच्चियों का खियार ढखियेगा
00:27और रानो, तुम मा का खियार ढखना और हमारे इस छोटे अंडे का भी
00:31जब हमारा बच्चा अंडे से बाहर आया, तो मुझे चिठी लिख देना
00:34पेती जी, आप चिंता ना करें, मैं सब का खियार ढखूंगी
00:37मानो जुड़ा नौकरी करने वदेश जा रहा था
00:40वो अपने परिवार से मिलकर घर से निकलता है
00:43मानो जुड़े के जाते ही सास चुड़िया के तो अंतास ही बदल जाती है
00:48गुड़िया, अरे ओ गुड़िया, मुझे पानी भी लाओ
00:51गुड़िया अपने दादी मां को पानी देती है
00:54दादी मां की आँखों में आंसु धे
00:56तुम दो मनहूसों की वज़ा से मेरे बेटे को परदेश चाना पड़ा
01:00तुम दोनों का बोच ही खाय जाता है मेरे बेटे को
01:03तभी रानो जुढ़िया का अंडा तूर जाता है
01:06और एक सुनदर सी बेटी बहिराती है
01:09लो जी आ गई एक और मनहूस मेरे बेटे की जान खाने
01:13यही होता अगर तु एक बेटे को जनम दे देती तो
01:17मेरा बेटा भी खुश हो जाता पर्देश में
01:20मा जी आप ये कैसी बातें कर रहे हैं
01:23ये हमारे हाथ में थोड़ी है ये तो उपरवाले की दिन है
01:26और हम बहुत खुश हैं आप ऐसी बातें ना करें
01:29मगर सास चुढ़िया मू फुला कर वहां से चले जाती है
01:34मम्मा क्या बेटियां बोच और मनहूस होती है
01:37दादो ऐसी क्यों बोल रही थी
01:39नहीं मेरी बेटी ऐसा मत सोचो
01:41तुम तो मेरे आंगन की रौनक हो
01:43तुम दादी की बात को दिल पे न लो
01:45दिन गुज़रते के चुढ़िया की सास का गुसा तो
01:48कम ही नहीं थी हो रहा था
01:50आज तो चुढ़िया की सास ने
01:52गुर्या को मारना ही शुरु कर दिया था
01:54मम्मा मम्मा मुझे बचाएं
01:56मुझे दादो से बचाएं
01:58माजी ये क्या कर रहे हैं आप
02:00छोड़िये मेरी बेटी को
02:02मेरी बेटियों को दुबारा न मारना
02:04मैं कर ही गोरी की दुगाँ से
02:06निया मटका लाई थी
02:08इस गुर्या की बची ने
02:10एक ही जढ़के में तोड़ दिया
02:12मम्मा मम्मा मैंने मटका जानबूच कर नहीं तोड़ा
02:14जब से आई है
02:16मन्हूस मारियों ने
02:18जिंदगी ही मुश्किल कर रखी है हमारी
02:20दातो तो चड़ैल बन गई है
02:22मैं पापा को बताओंगी
02:24अपनी छोटी बहन की बात सुनकर
02:26रोती हुई गुर्या भी
02:28हंसने लग दी है
02:30लो जी इसको भी लग गई जुबान
02:32इससे पहले कि ये मेरा जीना और मुश्किल करे
02:34अपनी बेटियों को लो
02:36और निकलो मेरे घर से बाहर
02:38चिड़िया की जालिम सास
02:40चिड़िया और उसकी बेटियों को
02:42घर से बाहर निकाल देती है
02:44और दर्वाजा बंद कर लेती है
02:46माजी माजी ऐसा ना करे
02:48किरपिया करे इतनी रात के
02:50मैं अपनी बेटियों को लेकर कहा जाओंगी
02:52ये सुल्म ना करे हम पर
02:54गोरी कवी अपने घर के दर्वाजे में खड़ी
02:56ये सब देह कर बहुत खुश हो रही थी
03:00बड़ा अच्छा हुआ
03:02शोखी चिड़िया तेरे साथ
03:04बड़ी शोखियां दिखाती थी
03:06मेरा बदी ऐसा, मेरा बदी वैसा
03:08आ गया सबात, बदी को बतेश भेज़ कर
03:10चिड़िया कवी की बातों का
03:12कोई जवाब नहीं देती
03:14और अपनी बेटियों को लेकर वहां से चली जाती है
03:16चिड़िया अपनी बेटियों को
03:18लेकर जा रही थी के बारि
03:20शुरू हो जाती है, पास ही
03:22मिठू का घर था, चिड़िया
03:24मिठू तोदे के घर जाती है, चिड़िया
03:26दर्वाजे पर दस्तक देती है
03:28मिठू भाईया, मिठू भाईया, दर्वाजा
03:30खो लो, मैं बहुत मुश्किल में हुँ
03:32मुझे एक रात के लिए अपने घर में
03:34चिड़िया दर्वाजे पर दस्तक देती रहती है, मगर अंदर से कोई जवाब नहीं आता
03:44फिर चिड़िया कबूदों के घर जाती है, मगर कबूदों पे दर्वाजा नहीं खोलता
03:49रात थी और उपर से तेज़ बारिश, चिड़िया को कुछ समझ नहीं आ रही थी
03:54कि वो कहां जाए, फिर उसे एक बेड़ के अंगर छेद नज़र आता है
03:59मम्मा, ये हम कहां आगे हैं? मम्मा, मुझे तो बहुत नहीं लग रहा है, मुझे पापा की बहुत आदा रही है
04:06अगर वो हमारे साथ होती है, तो दादों कभी भी हमें घर से ना निकाल थी
04:24चुरिया के घर जाती है, वो ये नहीं जानती थी कि चुरिया की बुड़ी सास तो बहुत चलाग है
04:30माजी, रात है, भादी शुरु ही है, मैं भाजन लेने नहीं जा बाई, मुझे कुछ भाजन दे दो, मैं बाद में वापिस कर जाओंगी
04:38मैं और तुझे भाजन दू, चल भाग यहां से, माजी, मैंने कहा, चल भाग यहां से
04:44चुरिया की सास गोरी को घर से बाहिर निकाल देती है, गोरी कवी मू बनाई अपने घर आ जाती है
04:51उस पुड़ी से अच्छी तो उसकी पहुँ ही थी, कमस कम बदल तो कर ही देती थी, इस पुड़िया का तो कुछ ना कुछ करना ही होगा, आने दो इसके बेटे को
05:00कुछ दिनों बाद मानो चुड़ा वापिस आ जाता है, गोरी कवी रास्ते में ही उसे सब बता देती है
05:22मानो चुड़ा रानो चुड़िया और अपनी बेटियों को पहले ही ले आया था, उसकी बुड़ी मा बहुत शर्मिदा होती है
05:40अपनी पोती की बात सुनकर दादी चुड़िया रोने लग जाती है
05:52फिर दादी चुड़िया अपनी तीनों बोतियों को अपने गले से लगा लेती है और वो सब खुशी खुशी रहने लगते हैं
05:59मैंने गोरी कव्री को बरसों दूद दिया था, मगर अब वो बकरी बुड़ी हो गयी थी
06:04अब उसके शरीर में इतने फाकत नहीं थी कि वो दूद दे सके, मगर अब उस बकरी की बीटी चंड़ा बड़ी हो गयी थी
06:11और वो अपनी मा की तरहां फूब दूद देती थी
06:29कालु कावा बकरी का दूद निकालता है और उसे बाजार में बेजने चला जाता है
06:41गोरी कव्री अपनी बकरी के लिए घास लेकर वापिस आ रही थी कि रास्ते में गोरी कव्री को उसकी मा मिल जाती है
06:49गोरी बेटी ये इतनी सारी घास चंदा के लिए लेकर जा रही हो क्या
06:53नहीं मा चंदा और उसकी मा बुढ़ी बकरी दोनों के लिए
06:57वो बुढ़ी बकरी अभी तक तुम्हारे पास है मेरी मानो तो उसे किसी कसाई को दे दो
07:03अब वो बकरी तुम्हारे किसी काम की नहीं है
07:07मा अगर हम माल्किन को दूद देती है तो हमारे मालिक भी हमारी बहुत अच्छे से सेवा करते हैं
07:13हमें समय पर घास देते हैं पानी देते हैं
07:17किसी दिन हमारे मालिक मुझे किसी कसाई को दे दे अब मैं उनके किसी काम की नहीं रही हूँ
07:29मा ऐसी बाते ना किया करें याद करें
07:33जब मैं चौटी सी थी और हमारे मालिक का घर भी बहुत ढूटा फूटा हुआ करता था
07:38फिर मालिक तुम्हारा दूट बेच बेच कर बहुत अमीर हो गया
07:42अब मालिक के घर में सब कुछ है
07:44मगर मुझे मालूम है बुढ़े पशू किसी को पसंद नहीं होते
07:49वही हुआ जिसका बुढ़ी बक्री मा को डर था
07:53आज गोरी कवी घर आते ही कालू से लड़ाई शुरू कर देती है
07:57कल से मैं घास सिरफ चंदा के लिए हिलाया करूंगी
08:01उस बुढ़ी बक्री का पेट भनने से मुझे क्या फाइदा
08:04वो चंदा की मा है चंदा अपनी मा के साथ खुश है
08:08इसलिए तो हमें बाल्टी भर कर दूद की देती है
08:11दूद चंदा देती है उसकी मा नहीं
08:14मैं तो उस बुढ़ी बक्री को बेच दूँगी
08:16ऐसा ना करना अगर ऐसा किया तो चंदा भी दूद देना बंद कर देगी
08:21ऐसा नहीं होगा
08:24फिर तूसरे दिन गोरी कवी एक कसाई तोटे के पास जाती है
08:28कसाई तोटे मेरे पास एक बक्री है वो दूद नहीं देती
08:32अब वो बुढ़ी हो गई है तुम वो बक्री मुझसे खरीद लो
08:35मैं शाम को आंगा और देखूंगा कि उस बुढ़ी बक्री पर थोड़ा मास भी है या नहीं
08:41चंदा और उसकी मां हरी घास खा रही थी कि तोटा कसाई आ जाता है
08:47चंदा बेटी वो तोटा एक बाल पहले भी आया था
08:51मेरी तरहां मेरी मां भी बुढ़ी हो गई थी
08:54यही तोटा उसे मालिक से खरीद कर ले गया था
08:58मा उसके पास रसी भी है वो तो सज में हम दोनों में से किसी एक को लेने आया है
09:04मालिक ने जरूर मुझे बेच दिया होगा
09:07अगर ऐसा हुआ तो मैं अपनी बेटी के बिना कैसे जी पाऊंगी
09:12मा मैं तो आपके बिना जीने की कलपना भी नहीं कर सकती
09:16ऐसा ना करे मालिक ऐसा ना करे
09:19तोटे कसाई वो सामने खडी है बकरी
09:22हाँ बकरी तो मैंने देख ली है बुढ़ी है इसका तो एक हजार ही मिलेगा
09:27बताओ लोगी क्या
09:29क्या करोगी एक हजार उपैसे वो बकरी हमारे साथ पली बड़ी है उसे ना बेचो
09:35तो क्या उसे घर में सजा कर रख लूँ वो अब हमारे किसी काम की नहीं है
09:40लाओ तोटे कसाई जो देते हो दो फिर तोटा कसाई
09:44गोरी को एक हजार उपै देकर बुढ़ी बकरी की तरफ भड़ता है
09:48दोनों मा बेटी आखरी बार एक दूसरे की तरफ देखती है
09:53और तोटा कसाई बुढ़ी मा बकरी को वहां से ले जाता है
09:57तोटा कसाई उस बुढ़ी बकरी को आके चील कसाई के पास पेश देता है
10:02और बुढ़ी बकरी दूसरे जंगल पहुं जाती है
10:05कालू जब अपनी छोटी बकरी चंदा का दूद निकालने जाता है
10:09तो आज दूद आधी बाल्टी से भी कम था
10:13कालू ये क्या इतना थोड़ा सा दूद
10:28फिर गोरी कवी चंदा को जा कर देखती है
10:31चंदा तो ऐसे खड़ी थी जैसे अभी गिर जाएगी
10:35कुछी दिनों में गोरी कवी के घर से राशन भी खतम हो जाता है
10:39क्यूंके अब उनके पास बेचने को ना दूद था और ना कुछ और
11:02शाम को गोरी और कालू तोते कसाई के पास चाते हैं
11:09अपनी मां के बिना उसकी बेटी हमारी चोड़ी बकरी बहुत बिमार हो गई है
11:13वो ना चारा खाती है ना पानी पीती है
11:17मगर मैंने तो वो बकरी चील कसाई को बेच दी है
11:20आप चील कसाई से जा कर पूछ ले
11:22गोरी और कालू जल्दी से दूसरे जंगल जाते हैं
11:26चील कसाई चंदा की मां को रसी से बांध कर छूरी चलाने ही वाला था
11:31कि गोरी और कालू पहुंझाते हैं
11:34रुको रुको चील कसाई ये बकरी आप हमें दे दे
11:37मैं पूरे 2000 में लाया हूँ इसे
11:41देंगे हम तुम्हें 2000 से भी कुछ जादा देंगे
11:46फिर गोरी और कालू अपने बकरी चील कसाई से वापिस ले लेते हैं
11:52बकरी अपने मालिक कालू और गोरी को देखकर बहुत खुश होती है
11:57गोरी चुपके से ले जाकर चंदा की मां को चंदा के पास खड़ी कर देती है
12:03चंदा जब अपनी आँखें खोलती है तो एक बार चौंक जाती है
12:07मां मां आप आगे मां मां मैं तो उसी दिन से बिमार हूँ
12:12दोनों बकरी मां बेटी आपस में मिलती हैं
12:15जिसे देखकर गोरी और कालू बहुत खुश होती है
12:19और चंदा उस दिन फिर से बाल्टी भर कर दूद की देती है
12:23कालू जी अब तो मैं कभी भी अपनी दोनों बकरियों को एक दूसरे से

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