00:00उस टैब एक खोड़ा है जिम्तीग बिट्टे की पैंटिंग पर...
00:03भरका वाला का प्रसार रहती है
00:06जिम्ती पर कोई कोई पेंटिंग सूट बाड़े लियोनाडू में...
00:13दोस्तो हमारी इस दुन्या में एक ऐसी पैंटिंग भी मूझूद है
00:17जिसको बनाने में 16 साल का अर्शा लगता है
00:24और इस पेंटिंग को देखने के लिए
00:26दुनिया के दूर दरास इलाइकों से लोग आते हैं
00:28और इस पेंटिंग की एक जलत देखने के लिए
00:30लोगों के लाइने तक लग जाती है
00:32जी आप दोस्तो हम बात करें
00:33दुनिया के लार्जिस्ट पेंटिंग मोनालीजा के बारे में
00:4621 अगस्ट, 1911 को
00:48फ्रांस के केपीटल पेरिस में
00:50मंडे मॉर्निंग का टाइन होता है
00:51और म्यूजिम तक्रीबन खाली होता है
00:53इसी बात का फाइदा उठाकर
00:54म्यूजिम के अंदर से
00:55तीन लोग निकलते हैं
00:56जिनके हाथों में
00:57मौनालीजा की पेंटिंग होती है
00:59और ये तीनों आदमी नज़दी की
01:00रेलिवेटेशन पर पोचकर
01:01सुबा की ट्रेन में
01:02बैठकर भागने की कोशिश करते हैं
01:04मगर ये तीनों पकड़े जाते हैं
01:06क्यूंके इनके जो हाथों में पेंटिंग थी
01:08वो कोई शोटी मूटी पेंटिंग नहीं थी
01:09वो दुनिया की फेमेस और महेंगी तरीन पेंटिंग थी
01:121662 में इस पेंटिंग की प्राइस
01:14100 मिलियन अमिर की डौलर थी
01:16और 2019 में इस पेंटिंग की प्राइस
01:19850 मिलियन अमिर की डौलर थी
01:21ज्याने कि 600 करोड की पेंटिंग को
01:23कोई भी चुराने की कोशिश कर सकता है
01:25मगर दोस्तों हिरान करने वाली बात तो यह है
01:27कि एक पेंटिंग बनाने में 16 साल का अरसा लगा था
01:3116 साल एक बहुती बड़ा अरसा होता है
01:33वो भी पेंटिंग बनाने में
01:35और यह पेंटिंग 1519 में कमप्लीट हुई थी
01:37असल में मोनलीजा की पेंटिंग
01:39बनाने में ज्यादा अरसा इस वज़ा से लगा था
01:41क्यूंकि मोनलीजा के सिर्फ होंट
01:43बनाने में 12 साल का अरसा लगा था
01:45मेरे दुनिया में आज भी बहुती फेमस नाम है
01:47जिस पर मेनी सॉंग भी बन चुके है
01:49लेकर यह वर्ड एंग्लिश नहीं है
01:51यह इटैलियन है
01:53जिसका मतलब है माई लेडी
01:55लेकर मायरीन कहता है कि लिउनाडो देविंची
01:57पेंटिंग अभी भी अदूरी है
01:59देविंची इसको अभी भी यूनिक बनना चाते थे
02:01मगर इसकी डेव्ट होने के कारण
02:03ये मुकमल ना हो पाई
02:05कहते हैं कि देविंची पेंटर के इलावा
02:07एंजिनियर, साहिसदान, एथ्यूस
02:09और आर्किटेक्स भी थे
02:11इस पेंटिंग में नजर आने वाले उरत आखिर कौन थे?
02:13और क्यों आजकल लोग इस उरत को लेकर
02:15अलग-अलग चनाख बताते हैं?
02:17पेंटिंग को लेकर सबसे पहला
02:19खुलासा जोरजो वसारी नामी इटैलिन
02:21आर्टेस्ट ने किया था
02:23जिसने 1550 में दे विंची की पेंटिक
02:25के उपर मालूमात लिखी थी
02:27जोरजो वसारी के मदाबिक
02:29इस उरत का नाम लिजा गिरादीन है
02:31और इस उरत ने फिलोरिंड शहर में
02:33रहने वाले एक सिलिट केडर के साथ
02:35मिरेज की थी जिसका नाम है
02:37वसारी के अकोर्डिंग
02:39फ्रांसको ने ये पेंटिंग
02:41अपने बेगम के लिए बनवाई थी
02:43इस पेंटिंग के दो नाम थे
02:45जिनमें पेला नाम जो आज भी मशूर है
02:47मोना लिजा और इसका दूसरा नाम
02:49लेजा गिरादीन है और आज भी
02:52आज भी अगर आप पेरेस में इस पेंटिंग को
02:54देखना चाहोगे तो इस पेंटिंग के उपर
02:56लेजा गिरादीन ही लिखा हुआ है
02:581550 में लोग ये यकीनी नहीं करते
03:00कि वसारी ने जो बताया है वो
03:02रियल स्टोरी नहीं वो fake है
03:04कि इसको अलग-अलग समझने लगे कि देविंची
03:06की मॉदर होगी तो कोई लोग समझने लगे
03:08कि एटलेन कोई राणी होगी तो पर ये
03:10पेंटिंग किसी उरत थी नहीं बलके जो
03:12कॉंडो ने इस पेंटिंग में खुद को ही बनाया था
03:14और इसने एमाइजन किया कि अगर वो एक उरत होते तो वो कैसे देखते हैं
03:18और ये सब बाते में अपनी तरफ से नहीं कह रहा हूँ
03:20बलके 1987 में
03:22लेलिम सचौर्टिस नामी एक उरत ने
03:24आर्टिकल लिखवाया था इस उरत ने
03:26अगर इस बात में कोई भी सचाई नहीं थी
03:28फैक्ट तो यही है कि ये पिक्चर
03:30मोना लीजा की थी
03:32इसी बात को प्रूफ करने के लिए
03:34फॉरोसिंग में रहने वाले एक प्रोफेसर
03:36ने इस पैंटिंग के उपर 25 साल तक
03:38रीसर्च की
03:40इसको ये भी सबूत मिला कि
03:42दवांची का करीबी रिष्टा था
03:44फ्रांस को जोकोंटो की फैमिली से
03:46इसको ये भी एवेडिन्स मिला कि
03:48लीजा की मेरेज पांश मर्झ
03:501495 के होई थी जब
03:52लीजा की एज़ 16 साल थी
03:54और फ्रांसको की एज़ 30 साल थी
03:56और इनको ये भी सबूत मिलता है कि
03:58दवांची के फादर और लीजा के अस्पेंड
04:00एक दूसरे के बोहती अच्छे दोस्त थे
04:02ये भी हो सकता है कि इस पैंटिंग
04:04मो बनने का काम मोना लीजा के अस्पेंड
04:06नहीं दवांची के फादर के दोरा
04:08करवाया गया हो
04:10पिलांटिंग के मताबगे
04:12जब ये पैंटिंग बनाए गए थी उस टाइम
04:14पे मोना लीजा की 24 साल थी
04:16इस पैंटिंग को बनाने के पिछे
04:18तीन कारण बताए जाते हैं जिनमें पहला
04:20कारण 1503 में जब मोना लीजा
04:22ने अपने खुद का घर पर्चेस किया था
04:24या फिर दूसरा उठ जब 1502 में
04:26इनका दूसरा बैटा पैदा हुआ था
04:28और तीसरा कारण थोड़ा अजीबी है
04:30क्योंकि जब आप इस पैंटिंग को
04:32जूम करके देखोगे तो आपको
04:34मोना लीजा के सर पर एक परदा चड़ा हुआ लज़र आएगा
04:36क्योंकि इतालियन कल्चर में ये परदा तब चड़ाया जाता है
04:38जब घर में किसी की डेथ हो गई हो
04:40अब सवाल ये उठता है
04:42कि देवांची और मोना लीजा इतालियन थे
04:44तो ये पैंटिंग इतली में होने के बज़े
04:46फरांस में क्यूं है
04:48इस पैंटिंग को चुराने की कोशिश की थी
04:50इतनी महंकी पैंटिंग को चुराना
04:52कोई आसान काम भी तो नहीं है
04:54असल में इस चोरों का मकसल सिर्फ यही था
04:56कि ये पैंटिंग इतली के अंदर होनी चाहिए थी
04:58जैसा कि हमने आपको पहले बताया
05:00कि ये पैंटिंग अखिर इतनी पापूलर हुई कैसे
05:02दर असल ये पैंटिंग सुर्ख्यों में तब आती है
05:04जब इस पैंटिंग को चुराया जाता है
05:06असा कि हमने आपको पहले ही बताया
05:08कि ये पैंटिंग 21 अगस्त 1911 को चोरी हुई
05:10दर असल ये पैंटिंग सुर्ख्यों में तब आती है
05:12जब इस पैंटिंग को चुराया जाता है
05:14असा कि हमने आपको पहले ही बताया
05:16कि ये पैंटिंग 21 अगस्त 1911 को चोरी हुई
05:18जहां से ये पैंटिंग चोरी होती है
05:20वहाँ का अमला परिशान होता है
05:22कि इतनी बड़ी पैंटिंग को आखे कैसे चुराया गया
05:24कहा जाता है कि इस पैंटिंग के चोरी के बाद
05:26पहला शक बाबु पकास उपर गया था
05:28मगर पुष्टाश के बाद और सबूत
05:30ना मिलने के कारिन इसको बात में
05:32रियाख कर दिया गया
05:34पाफी दिनों की पुष्टाश के बाद
05:36पता चलता है कि ये चोरी
05:38किसी और नहीं बलके म्यूजियूम के
05:40एक एपलोई ने की है वो भी एक
05:42इतालिन शक्त ने जिसका नाम वैं
05:44सैंजो पर गया और ये इतालिन शक्स
05:46था वो बताते हैं कि ये पैंटिंग चुरा
06:04पाफी दिनों की पुष्टाश के बाद
06:06पता चलता है कि ये एक एपलोई ने की है वह
06:08पता चलता है कि ये एक एपलोई ने की है वह
06:10पता चलता है कि ये एक एपलोई ने की है वह
06:12पता चलता है कि ये एक एपलोई ने की है वह
06:14पता चलता है कि ये एक एपलोई ने की है वह
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