इस भक्ति गीत में, जब धरती पर अधर्म और पाप का बोलबाला बढ़ जाता है, तब कल्कि अवतार के आगमन की महिमा गाई जाती है। गीत के बोल दर्शाते हैं कि कैसे कल्कि भगवान न्याय का प्रतीक बनकर धरती पर अवतरित होते हैं, अधर्म का संहार करते हैं, और धर्म की ज्योति को पुनः प्रज्वलित करते हैं। घोड़े पर सवार, तलवार हाथ में लिए, सत्य और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए उनकी लीला का वर्णन इस गीत में किया गया है। सत्ययुग के पुनर्स्थापना का सपना सजाते हुए, यह गीत हर दिल में भगवान कल्कि की महिमा को बसाने के लिए है। जय जय कल्कि!
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