Skip to playerSkip to main content
  • 2 years ago
Have you ever wondered what drives people to steal and commit petty crimes? The true answer lies in the real meaning of words like freedom, liberty and independence. What does it really mean to have freedom? This special video makes takes you through an interesting imaginary scenario and thought experiment.

Category

🎵
Music
Transcript
00:00नमस्कार दोस्तों!
00:01Imagine कीजिए Independence Day के दिन
00:03आप अपनी गाड़ी में बैठकर कहीं रस्ते पर सडग पर जा रहे हैं।
00:07अचानक से आपको सडग के साइड में एक बिखारी बैठा हुआ देखता है।
00:10देखकर लगता है कि ये काफी इलिटरिट है, गरीब है, बेघर है और भूखा है।
00:14तभी आप अपनी गाड़ी की खिड़की नीचे करते हैं और उससे देखकर कहते हैं
00:18आजादी मुबारक हो, आजादी के 75 साल पूरे हो गया है।
00:22ये सुनकर वो आपकी तरफ देखता है और कहता है, कौन सी आजादी भाई?
00:26आप कहते हो, अब ब्रिटिश राज से आजादी, 75 साल हो गया हैं जब से ब्रिटिश राज गया है, देश आजाद है।
00:32उसका जवाब आता है, तो मैं क्या करूँ? मेरा क्या मतलब इन चीजोस से?
00:36आप उसे समझाते हो, कि ब्रिटिश राज एक बहुत ही अनजस्ट और अनफेर रूल था.
00:41इंडियन्स को बड़े ही घटिया तरीके से ड्रीट किया जाता था, भारी टैक्स लगाय जाता था.
00:45ये अंग्रेज सारी इंडियन वैल्थ लूट कर अपने देश में ले जाते थे और बहुत से इंडियन्स को बुरी हालातों में जीना पड़ता था.
00:52कि नाँ इंडियन रूल आ चुका है, खुशी मनाओ इस चीज की.
00:55वो कहेगा भाई मेरी हालत तो वैसी की वैसी है, ना मेरे पास कोई खाना है, ना कपड़े है, ना घर है, ना कोई नौकरी है.
01:00मुझे क्या फ़रक पड़ रहा है, उपर गधी पर सत्ता में कोई इंडियन बैठे या ब्रिटिश बैठे? मैं तो तब भी भीक मांगता और अब भी भीक मांगता हूँ.
01:08दोस्तों, ऐसी डिबेट्स अक्सर सुनने को मिलती हैं, जो आपको सोचने पर मजबूर करती हैं, यह जो शब्द है, इंडिपेंडेंज्, फ्रीडम और लिबर्टी, असलियत में क्या मतलब है इन शब्दों का?
01:18इन दो शब्दों को ही ले लिजी, स्वतंत्रता यानि इंडिपेंडेंज और फ्रीडम यानि आजादी, सुनने में एक जैसे लगते हैं, लेकिन फर्ख बहुत है इन दो शब्दों के बीच।
01:27क्यूंकि भगत सिंग और गांधी जी की माने, तो आज के दिन हमारा देश स्वतंत्र जरूर है, लेकिन आजादी के लिए अभी आगे बहुत लंबा रस्ता तै करना है।
01:57आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के लिए आजादी के �
02:27और अफिशिली इंडिया एक रिपब्लिक बन जाता है
02:30फिर ओक्टूबर 1951 और फेब्रेरी 1952 के बीच में
02:33पहली इंडियन जेनरल इलेक्शन्स होती हैं
02:35और इंडिया को अपनी पहली डेमोकरेटिकली इलेक्टिड सरकार मिलती हैं
02:39तो देश एक इंडिपेंडेंट रिपब्लिक डेमोकरेसी बन गया
02:42सुनकर लगेगा कि ये क्लाइमेक्स है टोटल इंडिपेंडेंज का, आजादी का
02:47लेकिन यहां बात आती है भगत सिंग्गी
02:49भगत सिंग्ग ने अपने 1931 के पैमफलेट में लिखा था
02:52हमारी राय में पॉलिटिकल रेविलूशन का मतलब ये नहीं कि
02:55सत्ता को ब्रिटिश के हातों से लो और इंडियन्स के हातों में दे दो
02:59ऐसा नहीं है, हमारा फाइनल परपस है यहांपर
03:02जनता के बीच में एकनोमिक लिबर्टी एचीफ करना
03:05सही सुना आपने, भगत सिंग अगर जिंदा रहते 1952 के बाद तक
03:09तो उनकी लड़ाई वहाँ खतम नहीं होती
03:11उनका असली मकसद था एकनोमिक लिबर्टी एचीफ करना
03:14और इसका मतलब क्या है, ये समझने के लिए बिखारी के एक्जामपल पर फिर से आते हैं
03:18आप उस बिखारी की ये सारी बाते सुनकर कहते हैं कि भाई तू कोई काम धन्दा क्यों नहीं दूंड लेता अपने लिए
03:23कुछ काम दूंड, अपने लिए पैसे कमा, सब सही हो जाएगा
03:26जवाब में वो आपको कहता है कि मैंने सरकारी नौकरी में अपलाय करने ही कोशिश करी थी लेकिन नौकरियों की सक्त कमी है
03:32और ये चीज़ हम डेटा में भी देख सकते हैं
03:34करीब 20 दिन पहले ही Central Government ने लोग सभा को इंफ़र्म किया था कि पिछले 8 सालों में
03:3922 करोड जॉब अपलिकेशन्स रिसीव होई थी लेकिन सिरफ 7.22 लाक जॉब्स दी गई थी
03:45एकिन ये सुनकर आप कहोगे कि सरकारी नौकरी के पीछे ही क्यों भागना है?
03:48प्राइविट सेक्टर में नौकरी दून लो कोई?
03:50वो विखारी आप से कहेगा साब मेरी नौकरी लगवा दो, मैं कर लूँगा
03:53मैंने बहुत दूनने की कोशिश करी लेकिन मुझे किसी ने हायर नहीं किया, कोई नौकरी नहीं मिली
03:58फिर आप कहोगे कि भाई अपना खुद का कोई काम स्टार्ट कर ले ना फिर
04:01हमारे प्रदान मंतरी ने कहा था कि पकोडे बेचना भी एक तरीके की employment है
04:05और अगर वो नहीं करना, तो खुद से कोई skill सीख ले, जब skilled बनेगा तब अपने आप नौकरी मिल जाएगी कोई ना कोई
04:11ऐसे case में उसका जवाब आएगा, सर, किसी skill course में admission दिलवा दो ना फिर
04:15admission लेने के लिए भी पैसों की ज़रूबत होती है, मेरे पास यहाँ पर खाने तक के पैसे नहीं है
04:19कहां से मैं किसी course में admission लूँगा या skill सीखुंगा
04:22और जहाँ तक रही बात खुदका कोई पकोडे का stall खड़ा करने की तो आप मुझे बस 10,000 रुपे दे दो
04:28खुदका धन्दा शुरू करने के लिए भी कुछ starting capital चेही होता है, initial investment लगानी पड़ती है
04:34तो मैं stall खरीद लूँगा खुदका बस मुझे 10,000 रुपे lend कर दो, मैं वापस कर दूँगा बादमे
04:39जब मेरा धन्दा ठीक से काम करने लग जाएगा
04:41लेकिन आप खुद से सोचोगे कि मैं बस lecture दे सकता हूँ, पैसे नहीं दे सकता
04:45Point यहाँ बर यह है कि realistically सोचो दोस्तों, options क्या बचे उस बिखारी के पास
04:50सिरफ दो ही options है देखा जाये तो, या तो वो भीक मांग ले जो वो already करने लग रहे है
04:54या फिर वो कुछ भी ना करे और भूखा मर जाये
04:56अब क्या आप कहोगे कि उसके पास आजादी है इन दोनों में से कोई भी option चुनने की
05:00या तो भूखा मरने की आजादी है या फिर भीक मांगने की आजादी है
05:04ऐसे case में आजादी शब्द का प्रयोग करना भी एक मज़ाप लगता है
05:08उस बिखारी के पास कोई economic liberty नहीं है
05:11और आप शायद सोचोगे कि ऐसा असलियत में कौन अन्सान होता है
05:15तो पिछले ही साल दोस्तों निती आयोग ने डेटा release किया था
05:18multidimensional poverty index पर
05:20तीन broad dimensions, health, education and standard of living को account में लिया जाता है
05:24और इसके estimate के according, बिहार में
05:27आदे से ज़्यादा population actually में below poverty level है
05:30multidimensionally poor है
05:32इसके बाद ज़्यारखंड में 42% करीब उतर प्रदेश में 37% जंता
05:36इतने कम पैसे कमाने का मतलब है कि खाना भी barely afford कर पा रहे हैं लोग
05:41ऐसे case में कैसे expect कर सकते हो आप उनसे
05:43कि वो किसी भी type का काम धन्दा दूंड पाएं इस point of time पर हमारी imaginary situation में
05:48बहुत से लोग ये सुनकर तंग हो जाएंगे और सीधा जवाब देंगे भाई तु निकल यहां से
05:52बाड में जा मुझे क्या करना सबकी अपनी किस्मत होती है तेरी भी ये किस्मत है तेरी किस्मत में ये लिखा हुआ है मैं चलता हूँ यहां से
05:59लेकिन अब वो विखारी आपको पगड लेता है ऐसा नहीं साहब कुछ करो मेरा कोई नौकरी लगवा दो कोई तो काम शुरू करवा दो सरकार से कुछ करवा दो मैं भी चाहता हूँ अच्छे से जिन्दा रह सकूँ रोटी, कपड़ा, मकान, बिजली, पानी इतना तो मेर
06:29मिस्किया था कि 2022 तक हर किसी को घर मिल जाएगा, हर घर में सारी बेसिक
06:34फैसिलिटीज होंगी और उसकी लाव अभी अभी दो साल पहले ही प्रदान
06:37मंतरी गरीब कल्यान अन्योजना आयी है जो एक फूड सेक्यॉरिटी
06:40वहाँ से जाकर अपना राशन ले ले वो भी आप से कहता है कि साब इसी
06:44उमीद में हम बैठे हैं कि कब हमारा घर मिलेगा हमें कब घर में
06:47सब कुछ होगा वादे तो ये नेता लोग हर कोई करते हैं लेकिन उनकी
06:50बातों से लगता नहीं कि उन्हें कभी भी निबाएंगे जिस राशन
06:53स्कीम की आप बात कर रहे हैं अभी एक नेता ने हाली में
06:56खड़े होकर कहा था कि प्रदान मंतरी ने फ्री फंड का
06:59खाना दिया है अस्सी करोड लोगों को और जंतक को उन्हें धन्यवाद
07:03क्या प्रदान मंतरी मोदी यहाँ पर अपने परसनल बैंक अकाउंट से
07:05कोई पैसा दे रहे हैं क्या हम लोगों को किस क्यूं इस तरीके से
07:08हमें इंसल्ट किया जा रहे हैं उपर से जब भी कोई बाकी सिक्षा
07:11बिजली पानी जैसे फ्री चीजे देने की बात करी जाती है तो चार और
07:14नेता खड़े होकर उसके खिलाब बोल देते हैं कहते हैं यह क्या फ्री की
07:17रेवडी दे रहे हैं आप बोलोगे भाई बिखारी होकर तु सेल्फ रिस्पेक्ट
07:20की बात करता है यह क्या मजाक है इस point of time पर हमारी
07:23imaginary कहाणी एक serious mood ले लेती है यह बिखारी आप से
07:26कहता है सर इस तरीके से बात मत करो मेरी भी कोई इजट है मैं
07:29फाल्तू में फ्री का खाना नहीं खारा हूँ यहाँ पर एक समय
07:32पर मैं भी नौकरी किया करता था चौदा चौदा घंटे धूप
07:35में लेबर की नौकरी करता था और उस नौकरी के
07:38बदले मुझे minimum wage तक नहीं मिलती थी बस इतना
07:41इतनी कमाई होती थी दिन की कि barely मैं अपना खाना
07:44खा पाता था अपने परिवार का पेट बर पाता था इतनी महनत
07:47करके अगर सिरफ इतना ही मिलेगा तो कहां से मैं अपने बच्चों की
07:50सिक्षा अफ़ोड कर पाँगा सर कहां से मेरे पास पैसे होंगे
07:52बिजली का बिल देने के लिए जब GST इतना बढ़ रहा है
07:55अच्कल inflation में वैसे भी कहां मेरे को गुजारा चल पाएगा
07:59ये आप से कहता है साब आपने अच्छा किया सेल्फ रिस्पेक्ट की बात कर दी मेरे साथ
08:03अब मेरी आँखे खुल गई हैं अब से मैं भीक नहीं माँगूंगा
08:06अब से मैं चोरी करूँगा
08:08ये सुनकर आप हैरान हो जाते हो भाई ये क्या कह रहा है तू?
08:10चोरी करना गलत चीज है और भगवान देर को छोड़ेगा नहीं
08:14सर भगवान को तो मेरी वैसे भी फिकर नहीं है
08:16क्योंकि भगवान ने मुझे इस हालत में छोड़ा है कि मैं भूखा मरा पड़ा हूँ यहाँ पर
08:20लेकिन भगवान की छोड़ यहाँ पर कानून है देश में
08:23लॉआ उसे फर्बिट करता है तू पकड़ा जाएगा और एरेस्ट हो जाएगा
08:26सर कौन सा कानून कैसा कानून किसने बनाया किसके लिए बनाया
08:30नहीं डरता मैं जेल हो जाएगी सर लेकिन वो अभी की
08:33सिच्वेशन से तो बेटर ही होगा जेल में कम से कम धंका
08:36खाना मिल जाएगा सर जब से आपने सेल्फ रिस्पेक्ट की बात करी
08:40कि मैं चोरी करके अपना खाना लूँगा
08:42ये सुनकर आपको थोड़ा डर लगने लग जाता है क्या होगा
08:45अगर ये बिखारी और बिखारी हुए साथ एक गैंग बना ले
08:48इनके पास कहीं से कोई लोकल पिस्टॉल आ जाये और किसी दिन
08:51आपके आसपास के पडोसी पर या आपके परिवार मेंसे किसी पर ये लोग हमला कर दे
08:56कहीं डाका डाल दे कहीं चोरी करने लग जाये ये बिलकुल भी अच्छी चीज नहीं होगी
09:00अगर आप इसे कहते हो कि तु चोरी मत कर ये आपसे पूछेगा ठीक है सर
09:05मान लो मैं आपकी बात सुन लेता हूँ और चोरी नहीं करता लेकिन आपकी बात सुनने के बदले मुझे क्या मिलेगा?
09:10आपने मुझे हैपी इंडिपेंडेंस डे विश्च कर दिया यहाँ पर लेकिन मुझे थोड़ी सी बेसिक आजादी तो दे दो
09:16और जब आप इसे कहते हो कि चलो मैं बदले में कोई सरकार की तरफ से कोई ना कोई स्कीम जरूर दिलवाँगा तुम्हें
09:22तो इसके और आपके बीच में एक सोशल कॉंट्राक्ट हो गया है
09:25इस कॉंट्राक्ट में आप उसके लिए बेसिक facilities इंशौर कर रहे हो करवाने की कोशिश कर रहे हो और दूसरी तरफ से वो आपके लिए सेफ़्टी इंशौर कर रहा है
09:33कि वो चोरी नहीं करेगा यहाँ पर एक क्रिमिनल नहीं बनेगा
09:36फ्रेंच रेवुलिउशन वाले वीडियो में मैंने आपको समझाया था कि कहां से इन विचारों के शुरुवात होई थी
09:40जो एज ओफ इन्लाइटिनमेंट के बड़े थिंकर्स थे जैसे की रुसौ, थॉमस हॉब्स और जॉन लॉक
09:45इन्होंने फाउंडेशन ले करी थी डेमोकरसी और लिबर्टी जैसे शब्दों की
09:49अब रुसौ का कहना था कि जन्ता का सरकार के साथ भी ऐसा ही एक सोशल कॉंट्रैक्ट होता है
09:55मूचूल प्रेजर्वेशन का सोशल कॉंट्रैक्ट
09:58सरकार आपके लिए बेसिक फैसिलिटीज इंशौर करे ताकि आप जिंदा रह पाएं एक अच्छी जिंदगी जीप पाएं
10:04और इन रिटर्ण आप सरकार का सर्वाइवल इंशौर करें कि सरकार यहाँ पर बनी रहेगी खतम नहीं हो जाएगी
10:09रुसॉ का ये भी कहना था कि लिबर्टी विदाउट एकवाल्टी इस नट लिबर्टी अटॉल यानी बिना एकवाल्टी के, लोग सही माइंों में आजाध हो ही नहीं सकते
10:18अब यहाँ पर equality का मतलब ये नहीं कि हर किसी के पास एक जितने पैसे हों.
10:22Equality का मतलब ये है कि लोग कानूम के सामने एक बराबर हों,
10:25लोगों के बीच में discrimination ना हो,
10:27सबको equal opportunities दी जाएं.
10:29अगर कोई बिखारी यहाँ पर अपना पकोडे का स्टॉल लगाना चाहता है,
10:32तो कम से कम उसके पास इतने पैसे तो हों,
10:34कि वो अफोर्ड कर पाए यहाँ पर initial investment ये पकोडे का स्टॉल लगाने के लिए.
10:39अगर किसी middle class family का कोई बच्चा चाहता है,
10:42तो उसके परिवार के पास इतने तो पैसे हों,
10:45कि वो अच्छी सिख्षा दे पाए अपने बच्चों को.
10:47मौका सबको मिलना चाहिए उपर उठने का.
10:49स्टार्टिंग लाइन इतनी सेम होनी चाहिए,
10:51कि कम से कम कोई भी इंसान खाने के लिए,
10:54पानी के लिए, घर के लिए,
10:55सिख्षा के लिए ना तडब रहा हो.
10:57एक आम आदमी अपने सारे खर्चे करने के बाद,
10:59कम से कम इतने पैसे बचे उनके पास,
11:01कि वो अपने लिए एक जीने लाइग जिन्दगी
11:03अफोर्ड कर पाए.
11:05आप सोचल कॉंट्राक्ट में ये भी कहते हैं,
11:07कि कोई भी आदमी इतना अमीर नहीं होना चाहिए,
11:09कि दूसरा उसे खरीच सके.
11:11और ना ही कोई बंदा इतना गरीब होना चाहिए,
11:13कि उसको खुद को बेचना पड़े.
11:15इसी सोचल कॉंट्राक्ट के बेसिस पर
11:17भगत सिंग् ने कहा था,
11:19फ्रीडम इस एन इंपेरिशिबल बर्थ राइट,
11:21और रेवलूशन इस एन इन एलियनेबल राइट.
11:23अक्शुली सिर्फ भगत सिंग् नहीं,
11:25बलकि गांधी जी भी इस सोच को सपोर्ट करते हैं.
11:27गांधी जी ने लिखा था,
11:29अगर कभी आपको डाउट हो कि
11:31आप क्या एक्शन करने जा रहे हैं,
11:33वो आपको करना चाहिए और नहीं करना चाहिए,
11:35आपके एक्शन का क्या इंपैक्ट होगा,
11:37देश के सबसे कमजोर और सबसे गरीब लोगों पर.
11:41इसके लावा गांधी जी जब स्वराज शब्द का इस्तिमाल करते थे,
11:44तो उसका मतलब सिर्फ पॉलिटिकल सेल्फ रूल नहीं था.
11:47इसके मतलब हर तरीके से आजादी था.
11:49भुकमरी से भी आजादी था.
11:51वो बिखारी आप से कहता है,
11:52जब समाज को कोई मेरी चिंता ही नहीं है,
11:54नाहीं सरकार को मेरे से कोई मतलब है,
11:56तो मैं क्यूं एक लौ अबाइडिंग सिटिजन बनू?
11:59और ये एक ऐसा सेंटिमेंट है दोस्तों,
12:01जो नैचिरली लोगों के अंदर जाग सकता है.
12:03उन्हें कोई भगत सिंग या रुसो की किताबे पढ़ने की जरुवत नहीं है.
12:07कुछ इसी तरीके से दोस्तों हमें जन्म होता हुआ दिखता है,
12:09क्राइम समाज में बढ़ जाता है.
12:11क्योंकि जब एकनोमिक लिबर्टी नहीं है समाज में,
12:14तो बहुत से लोग मजबूर हो जाते हैं,
12:17प्रॉफ़िट के लिए क्राइम्स करने को.
12:19इस बिखारी का ही एक्जांपल ले लीजीए,
12:21इसके केस में, या तो भीक मांगो या मरो,
12:24या फिर तीसरा option, चोरी करने लग जा.
12:27यही कारण होता है, छोटी मोटी करप्शन के पीछे भी.
12:30फ़ोर एक्जांपल, एक ट्राइफिक पुलीस कॉंस्टेबल का एक्जांपल ले लो.
12:34यह पूरे दिन, गर्मी में और पुलिशन में सडक पर खड़ा रहता है.
12:38ओवर वर्क्ट है, अंडर पेड है, ढंग से सेलरी नहीं दिजाती उसे.
12:41और फिर उसे अखबारों में दिखता है, कि यहाँ पर लाखो करोडों के स्कैम होने लग रहे हैं.
12:45यहाँ पे अरब पतियों को इतने करोड के बैंक लोन्स दिये जा रहे हैं, और वो वापस भी नहीं चुकारें उन्हें.
12:51इसके मन में नैचुरिली सेंटिमेंट जागेगा, कि यहाँ पर लाखो करोडों के NPA's हैं.
12:57मेरी हालत ऐसी है, मैं यहाँ सडक पर खड़ा हुआ हूँ, क्या गलत है अगर मैं यहाँ पर 100 रुपे की रिश्वत ले लूँगा तो?
13:03फिर अगली बार यह किसी को पगड़ता है ट्राफिक रूल्स तोड़ते हुए, चलान काटने की जगह यहाँ पर रिश्वत ले लेता है, और जिसने वो ट्राफिक रूल तोड़ा है, वो अक्शुली में बाकी समाज के लिए खत्रा बन जाता है.
13:13तो पॉइंट यह है दोस्तो, अगर एक सोसाइटी में हम दूसरों की लिबर्टी की, दूसरों की आजादी की चिंता नहीं करेंगे, तो यहाँ पर एक भयंकर जाल बन जाता है. समाज में डिस सैटिसफैक्शन बढेगी, और आजादी से मेरा मतलब यहाँ पर सिर्फ बोल
13:44वो आपको दूंडेंगे, अडेंटिफाइ करेंगे, और आपका बॉलेट आप तक वापस पहुचा देते हैं.
13:48क्या कारण है कि इन देशों में क्राइम रेट अल्मोस्ट जीरो है?
13:52क्यूँकि वापर अल्मोस्ट हर एक इंसान को एक बेसिक स्टेंडर ओफ लिविंग मिला हुआ.
13:56हर कीसी के पास एक घर है, अच्छी सिक्षा है, अच्छे कपड़े हैं पहनने को, अच्छे से खाना मिल जाता है, उन्हें अच्छी नौकरी है.
14:02ऐसे केस में किसी को जरूरत ही नहीं है कोई गलत काम करने की, और हर कोई खुश भी है, इसलिए कोई चोटी मूटी करप्शन करने का भी कारण नहीं बचता.
14:10अब यहाँ पर बात सिरफ एकनॉमिक लिबर्टी की नहीं है, बलकि सोशल लिबर्टी की भी है.
14:14इंडिया में 2022 में, हमें कितनी खबरे देहने को मिलती हैं, जहाँपर एक दलित इनसान को मार दिया गया, दंदो से मारा गया, पीटा गया, क्योंकि वो घोड़े पर बैठ गया,
14:21क्योंकि किसी जगें से पानी पी लिया उसने किसी कुए से,
14:24किसी मंदिर में चला गया, असी कितनी सारी आपको न्यूज मिल जाएँगी अगर आप सर्च करोगे तो।
14:28Similarly, लड़कियों के लिए भी ऐसा ही है।
14:31जेंडर के मामले में भी डिस्क्रिमिनेशन है, लिबर्टी नहीं है।
14:34पिछले साल नवेंबर में ही, उत्तर प्रदेश में खाब पंचायत ने
14:37जीन्स को बैन किया, मॉबाइल फोन्स को बैन कर दिया लड़कियों के लिए।
14:40अब कपडो की choice आपको लगेगा कि एक higher up matter है, कोई इतनी बड़ी चीज नहीं है
14:45लेकिन ये भी एक लिबर्टी का जरिया है।
14:48अगर किसी भी तरीके की लिबर्टी या आजादी लोगों से छीनी जाएगी,
14:51तो लोगों के अंदर dissatisfaction ज्यादा आएगी।
14:53और समाज में dissatisfaction का नतीजा हमने अलड़ी देखा क्या होता है।
14:57अब imagine करो अगर 5000 औरतें इसी चीज के अगेंस प्रोटेस्ट करने के लिए
15:02सड़क को occupy करके बैठ जाती हैं और demand करती हैं कि उन्हें उनकी लिबर्टी वापस दीजें।
15:07या फिर मानलो कुछ 1000 डलित लोग बैठ गए सड़क पर इन crimes के अगेंस्ट।
15:11या फिर किसान लोग बैठ गए सड़क ब्लॉक करके कि हमें अपनी आजादी वापस चाहिए।
15:16Actually में इसके ढेर सारे examples हो सकते हैं।
15:18CA NRC के प्रोटेस्ट को ले लो।
15:20Students के प्रोटेस्ट ले लो और जब वो fees high के अगेंस्ट प्रोटेस्ट कर रहे थे।
15:24Doctors के प्रोटेस्ट की बात कर लो।
15:26प्रोटेस्ट को देख कर आप अगर कहो गए कि भाई क्या है मुझे नहीं पता तुम लोगों का issue क्या है और frankly I don't care लेकिन प्लीज ये सड़क खाली करो यहां से।
15:36सड़क खाली करो क्योंकि मुझे inconvenience हो रहा है।
15:38अगर आपको सिरफ अपने inconvenience की पढ़ी है तो आपने ये social contract तोड़ दिया है।
15:43क्योंकि आपको उनके issue की कोई परवा नहीं है उनकी liberty की कोई परवा नहीं है और इसका end result आपको अपनी life पर वैसे भी दिखेगा ही दिखेगा।
15:51तो इस वीडियो को बनाने के पीछे मेरा purpose यही है कि आप आजादी शब्द का मतलब समझ पाएं। और आप समझ पाएं कि हमारे freedom fighters भगत सिंग्ष, सुभास चंडर बोस, गांधी जी, पंडित नहरू, रबिंदर नार्ट एगोर जी ने क्या envision किया था। उनकी माइने में �
16:21ऐसा करने से ही देश सही माइनों में एक developed country बनेगा।
16:25बहुत भौत धन्यवाद!
Comments

Recommended