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  • 2 years ago
ISRO is a name that brings pride to all Indians. In a very short span of time, it has made its mark in the world as a premiere space agency. ISRO has gained a reputation for being efficient, cost effective and largely successful in its missions. But do you know how ISRO was formed and how it became one of the most revered space agencies? Who was the man behind ISRO? And most importantly, where does it stand when compared to NASA. This is the story of ISRO. A success that has been equally contributed by the dedication of men & women working for ISRO. A never ending story of rich Indian capabilities in science & technology. This is one of the stories of The Times of a Better India.

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00:00गमसकार दोस्तों, साल 1947 की बात है.
00:03सेकिन्ड वर्ड वार को खतम हुए सिरफ दो साल गुज़रे थे
00:06और अमेरिका और सोवियेट यूनियन के बीच में तनाव बढ़ने लग रहा था.
00:10ये दोनों देश दो सूपर पावर्स की तरह उभर कर आये थे वार के बात.
00:14लेकिन इन दोनों की पॉलिटिकल आईडियालोजीजी में एक जबरदस्ट क्लैश देखने को मिला.
00:18इनके बीच भारी राइविलरी की वज़े से कोल्ड वार की शुरुबात हुए.
00:23इस समय में ये दोनों देश अपने न्यूक्लियर हतियारों को और ताकतवर बनाने की कोशिश कर रहे थे.
00:29इसी के लिए ये दोनों देश एक एंटर कॉंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाईल की डेवलप्मेंट करने लग रहे हैं.
00:35एक ऐसी मिसाईल जिसका इस्तिमाल किया जा सके न्यूक्लियर हतियारों को डिलिवर करने के लिए.
00:40एक कॉंटिनेंट से दूसरे कॉंटिनेंड, अमेरिका से सोवियेट यूनियन पर या सोवियेट यूनियन से अमेरिका पर.
00:46इन आईसी बीम्स को इतने लंगे डिस्केंची करने के लिए बेसिकली बहार की स्पेस में डॉकेट लॉंच करना पड़ता है.
00:53तो दोनों देशों को पता था कि अगर किसी भी देश ने ऐसी टेक्नॉलिजी डेवलब कर ली जिससे स्पेस में पहुंचा जा सकता है,
00:59कुछ देश के पास हतियारों के मामले में एक बहुत बड़ा एडवांटेज होगा.
01:02इसी रीजन से दोनों देश कॉंपिटेशन में लग गए कि कौन पहले स्पेस तक पहुंच सकता है.
01:07इन दोनों के बीच में एक स्पेस रेस की शुरुबात,
01:10साल 1955 में अमेरिका ने अनॉंस किया एक प्लैन कि वो आर्टिफिशल सैटलाइट लॉंच करेंगे स्पेस में.
01:20इस अनॉंस्मेंट के कुछ ही दिन बाद सोवियेट यूनियन ने कहा कि वो भी आर्टिफिशल सैटलाइट लॉंच करना चाहते हैं.
01:26करीं दो साल बाद, अक्टूबर 1957 में, सोवियेट यूनियन इस रेस में आगे निकल गया.
01:31उन्होंने इतिहास रच दिया, स्पूटनिक को लॉंच करके, दुनिया की पहली आर्टिफिशल सैटलाइट.
01:38एक महीने बाद, उन्होंने एक और सैटलाइट भेजी, स्पूटनिक 2.
01:42इस बारी सैटलाइट के अंदर पहली बार एक लिविंग क्रीचर था.
01:45एक कुट्टा, जिसका नाम था लाइका.
01:47इसी बीच, इंडिया में बैठे एक साइंटेश्ट, डॉक्टर विक्रम सारा भाई.
01:52बड़ा इंस्पायर्ड फील होने लगे, इस साइंटेश्ट में पहली बाद करके था.
01:56इस बारी सैटलाइट के अंदर पहली बार एक लिविंग क्रीचर था.
01:59इसी बीच, इंडिया में बैठे एक साइंटेश्ट, डॉक्टर विक्रम सारा भाई.
02:02बड़ा इंस्पायर्ड फील होने लगे, इस साइंटेश्ट में बाद करके था.
02:05इस बारी साइंटेश्ट में पहली बार एक लिविंग क्रीचर था.
02:07साल 1962 तक, इनोंने जवाहर राल नेहरू को कन्विंस कर दिया था,
02:11कि इंडिया के पास भी अपना एक स्पेस प्रोग्राम होना चाहिए.
02:15इस बारी साइंटेश्ट में जवाहर राल नेहरू को कन्विंस कर दिया था,
02:18इस बारी साइंटेश्ट में जवाहर राल नेहरू को कन्विंस कर दिया था,
02:20कि इंडिया के पास भी अपना एक स्पेस प्रोग्राम होना चाहिए.
02:22और कुछ इस तरीके से जन्म होता है दोस्तों, इसरो को.
02:24और कुछ इस तरीके से जन्म होता है दोस्तों, इसरो को.
02:49सोला हजार से भी जादा लोगों का इसरो संगखन है.
02:52इससे पूरी तरह से भाज़िय संगखन कह सकते हैं.
03:04सुरवात में इसरो का नाम होता है इंको स्पार,
03:07इंडियान नैशन कमिटी फोर स्पेस रीसर्च.
03:09और प्रधान मंतरी जवाहर राल नेहरू,
03:12इसे सेट अप करते हैं अंडर देपार्टमेंट अटॉमिक एनरजी.
03:15डॉक्टर विक्रम सारा भाई को इसका चेयर्मेन बनाया जाता है और यही रीजन है,
03:19कि डॉक्टर सारा भाई को हम आज के दिन जानते हैं,
03:21एस दे फादर औफ इंडियन स्पेस प्रोग्राम.
03:24अपने शुरू के दिनों में इंको स्पार के पास बहुत ही लिमिटेड इंफरास्ट्रेक्चर और रीसौर्सेज होते हैं.
03:28यही कारण है कि ऐसी फोटोज आपको देखने को मिलेंगी,
03:31जहाँ पर रोकेट के पार्ट्स को, साइकलो पर और बुलक कार्ट्स पे ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है.
03:36ऐसे ही इंको स्पार को किसी दूर के गाउ में, एक पुराने चर्च में बिशब के घर को,
03:41कंट्रोल रूम बनाना पड़ता है.
03:43तो दूसरी तरफ ऐसे भी केसिस देखे गए हैं,
03:45जहाँ पर बैंगलूरू में किसी एक टॉयलेट को,
03:47रीपरपस किया गया ऐसा साटेलाइट डेटा रिसीविंग सेंटर.
03:51रीसॉर्सीज की कमी की एज़े से बहुत जुगाड करना पड़ा था शुरू में.
03:55लेकिन इंडिया की स्पेस जर्नी अल्मोस्ट इमीजेटली शुरू हो गई थी.
03:58नवेंबर 1963 में, इनकोस पार के एस्टैबलिश होने के सिरफ एक साल बाद,
04:02इंडिया ने अपना पहला रॉकेट लॉंच किया था. ये एक साउंडिंग रॉकेट था.
04:06एक ऐसा रॉकेट जिसमें इंस्टुमेंट्स होते हैं, अलग-अलग मेजर्मेंट्स लेने के लिए.
04:09अर्थ की आट्मॉस्फेर में इलेक्ट्रॉन्स को स्टडी करने के लिए इसे लॉंच किया गया था. और उस वक्त इसे सप्लाइ किया था नासा ने.
04:15इसके सक्सेस्फुल लॉंच के बाद एंडियन साइन्टिस्ट को एकस्पेरियेंस मिला, नासा से सीख मिली, और फिर हमने बनाया अपना पहला खुद का साउंडिंग रॉकेट.
04:23इसके कुछ साल बाद, 15th August 1969 को, इंडिया के 22nd year of Independence में, इनको स्पार को रिनेम कर दिया जाता है इसरो.
04:39क्योंकि अब ये सिरफ कोई कमिटी नहीं थी, ये अपनी खुद की एक उर्गनाईजेशन बन गई थी.
04:43ये एक सी उर्गनाईजेशन जिसका मक्सद था स्पेश टेकनोलोजी का इस्तिमाल करना देश की विकास के लिए.
04:48एक बार फिर से डॉक्टर सारा भाई को चेरमेन बनाया जाता है इस उर्गनाईजेशन को.
04:52डॉक्टर सारा भाई की लीडर्शिप के अंडर, इसरो के साइंटेस बड़ी मेहनत से काम करते हैं, स्पेश टेकनोलोजी की फील्ड में.
04:58साल 1975 में जाकर, इंडिया अपनी पहली आर्टिविशल सैटलाइट लॉंज करता है, जिसका नाम होता है आर्यभट.
05:06आर्यभट जब पर आर्यभट की पहली आर्डियाच प्रशक्ति नाम होता है, कि आर्यभट की लीडर्शिप की वाज़ डॉक्टर सारा भाई जिंदा नहीं रहते है इस मौकाम को देखने के लिए.
05:20उनका दिहान साल 1971 में ही हो जाता है कार्डियाक अरेस्ट की वाज़ा से
05:25लेकिन उनके बाद अगले इस्रो चेर्बन बनते हैं सतीश धवन
05:28एक बहुती टालेंटिट मैठेमेटिशियन और एरोस्पेस साइन्टिस्ट
05:32वैसे यह जो पहली साटेलाइट की लाउंच थी
05:34यह की गई थी सोवियेट उनियन से
05:36इसरो ने सोवियेट उनियन के मदद ली थी
05:38क्योंकि इंडिया और सोवियेट की बीच में एक एग्रीमेंट होई थी
05:41आने वाले दशक में 1980s में नए रिकॉर्ड्स तूटते हैं
05:44इंडिया सक्सेस्फुल हो जाता है अपना खुद का साटेलाइट लाउंच वेहिकल बनाने में
05:48तो बाकी देशों पर अब रिलाय करने की जरूत नहीं साटेलाइट लाउंच करने के लिए
05:52पहला साटेलाइट लाउंच वेहिकल SLV-3 इस्तिमाल किया जाता है रोहीनी साटेलाइट को ओर्बिट में भेजने के लिए
05:58और इसके बाद ईस्रो कई और साटेलाइट लाउंच वेहिकल पर काम करता है
06:02जैसे की Augmented Satellite Launch Vehicle- ASLV या फिर Polar Satellite Launch Vehicle- PSLV
06:08Geosynchronous Satellite Launch Vehicles- GSLV जिसका इस्तिमाल किया जाता है साटेलाइट को जियो स्टेशनरी ओर्बिट में भेजने के लिए
06:16साल 1983 में इस्रो एक बारी फिर से NASA की मदद लेता है
06:20INSAT साटेलाइट को लाउंच करने के लिए
06:22INSAT का full form है Indian National Satellite System
06:25Basically, एक series of communication satellites जिन्ने अर्थ के और्बिट में डाला जाता है
06:30जिनका मकसद है Radio waves के थूँ कुम्यूनिकेशन किया जा सके
06:33इसकी मदद से अब एंडिया में टेलिविजिन ब्रोटकास्टिंग करी जा सकती थी
06:37वेधर की फोरकास्टिंग करी जा सकती थी
06:39कोई बड़ा डिजास्टर आ रहा है, कोई टोर्नेडो आ रहा है कहीं पर
06:42पहले ही warning दी जा सकती थी इन साटेलाइट की मदद से
06:45इंटरस्टिंग चीज ये थी देखनी जहाँ एक तरफ अमेरिका और सोवियेट युनियन एक दूसरे से
06:49बड़े competition में लगे हुए थे
06:51इंडिया ने time to time इन दोनों ही देशों की space agencies की मदद ली
06:55April 1984 में एक और record तूटता है
06:58राकेश शर्मा एक former Indian Air Force के pilot पहले और इकलोते Indian citizen बन जाते हैं
07:04Space में जाने वाली
07:06ये actually में Soviet Union के rocket
07:08Soyuz T-11 में बैठकर Space में गए थे
07:10आठ दिन तक Space में रहे थे
07:12as a part of Soviet Inter-Cosmos Program
07:15वैसे ऐसी useful खबरों से updated रहने के लिए
07:17एक चीज मैं कहूँगा कि
07:20अखबार पढ़ना एक बहुत अच्छा source है knowledge gain करने के लिए daily
07:25news channel पर जब कभी कोई खबर दिखा जाती है
07:27तो उसे एक गंटे के time slot को fill-in करने के लिए
07:29खबर को खीचना पढ़ता है
07:31उस पर फाल्तू की discussions करनी पढ़ती है
07:33हला मचाना पढ़ता है attention बनाए रखने के लिए
07:36दूसरी तरफ अखबारों में जितनी बड़ी खबर है
07:39जितना कुछ कहने को है उतना ही बड़ा article लिखा जाता है
07:42और लिखते वक्त articles को एक certain level of research करनी पढ़ती है
07:45जिससे की quality आती है
07:47ये मैं generally हर type की अखबार के लिए कह रहा हूँ
07:49लेकिन एक अखबार जो मैं आपको suggest करूँगा आप try कीजिए
07:52वो है Times of India
07:53especially इनका नया initiative The Times of a Better India
07:56ये focus करता है एंडिया की success stories पर
07:59लिंक नीचे description में मिल जाएगा
08:01चेक आउट करके देख सकते हैं
08:03अगले दो दशकों में ISRO की गती और तेजी से बढ़ती है
08:05साल 2008 में Chandrayaan-1 mission successful हो जाता है
08:09इंडिया का पहला mission चांद पर जाने वाला
08:23ये एक turning point बन जाता है पूरी organization के लिए
08:25दुनिया को पता लगता है कि ISRO भी यहाँ पर क्या करके दिखा सकता है
08:29और जब तक 2013 में इंडिया का पहला Mars Orbiter mission launch किया जाता है
08:33और इंडिया इतिहास में पहला देश बन जाता है
08:36Mars के orbit में successfully enter करने वाला first attempt में
08:59इसरो को as a space agency दुनिया की top space agencies में गिना जाने लगता है
09:08इंडिया को एक space super power माना जाने लगता है
09:11ये Mars mission काई माइनों में एतिहासिक था
09:14इंडिया चोथा देश था सिरफ orbit में जाने वाला Mars के
09:17और हमने एकर दिखाया था सिरफ 74 million dollars की cost में
09:21जोकि बहुत कम cost होती है
09:23अगर हॉलिवूट फिल्म बनी थी Martian उस फिल्म का बज़ेट ही इंडिया के
09:27mission के बज़ेट से ज़्यादा था
09:29108 million dollars उस पर spend किये गए था
09:31वरसिस 74 million यहाँ पर
09:33लेकिन एक सवाल जो बहुत से लोगे मन में यहाँ पर उठता है
09:36इसरो की यह बड़ी achievements
09:38नासा के सामने कितनी फिट बैठती है
09:40क्या इसरो नासा की बराबरी कर सकता है
09:43अब नासा की स्थापना दोस्तो
09:45सिरफ 4 साल पहले करी गई थी इसरो से
09:47साल 1958 में
09:49लेकिन तब से लेकर अब तक
09:51नासा ने 1000 से ज़्यादा unmanned missions और करीब
09:53245 missions लाउटर स्पेस में लाउटर की है
09:57इन मेंसे सबसे बड़ा था साल 1969 में
09:59जब पहली बार
10:01इनसानों को चांद पर भेजा गया
10:14नील आमस्ट्रॉंग पहले आदमी बन गए
10:16चांद पर कदम रखने वाली
10:18अपोलो 11 के mission में
10:24अमेरिका आज के दिन इकलोता देश है
10:26जिसने इनसानों को चांद के सर्फिस पर लैंड कराया
10:29इसके लावा इनका कैपलर स्पेस टेलिसकोग
10:31जिसने हजारो एकजो प्लानेट्स को डिस्कवर किया है
10:33यहनी वो प्लानेट्स जो हमारे सोलर सिस्टम के बाहर है
10:36नासा के मदद से ही इंटरनाशिनल स्पेस टेशन को ...
10:40लोर अर्थ और्बिट मेर प्लेस किया गया
10:42एक ऐसा स्पेस क्राम्ब जिसमें इनसान रह सकते हैं
10:44काम कर सकते हैं और एकस्पेरिमेंटस कर सकते हैं
10:47फिर नासा ने मार्स के सर्फिस तक पर भी रोवर्स भेजे हैं
10:51जैसे कि 2015 में Curiosity rover मार्स की जमीन पर लेंड किया
10:55और पानी का पहला एविडेंस पाया
10:58कि मार्स पर लिक्विड स्टेट में water exists करता है
11:01और हाल ही का जो famous James Webb Space Telescope है
11:03जिस पर मैंने दो वीडियो भी बनाया है
11:05आप जाकर देख सकते हैं
11:07इनका लिंक मैं इंचे description में डाल दूँगा
11:09बहुत ही नई चीज़ें जिसकी वज़े से मैं पढ़ा चली
11:11ये भी NASA ने ही लॉंच की है
11:13तो क्या कारण है अक्शुली में
11:15आपकी space agencies के comparison में
11:17इतना आगे है
11:19इसके भीचे सबसे बड़ा reason तो दोस्तो वही है
11:21जिसकी मैंने वीडियो के शुरू में बात करी थी
11:23NASA को साल 1958 में established किया गया था
11:25Soviet Union के response में
11:35Soviet Union जब इस race में दोड़कर आगे निकल गया
11:37तब अमेरिका को लगा
11:39कि हम पीछे कैसे रह सकते हैं
11:41हम भी civilian capacity में
11:43अपना space program बनाते हैं
11:45इन दोनों के बीच में इतना ज़्यादा fierce competition था
11:47कि इतनी ज़्यादा innovation हमें देखने को मिली
11:49इसके लाबा दूसरा कारण है
11:51NASA के goals
11:53NASA के goals अगर आप detail में देखोगे
11:55उनका basically मकसत है
11:57mankind की knowledge को increase करना
11:59और इंसानों की presence space में बढ़ाना
12:01इसे आप ISRO से compare करो
12:03तो ISRO को actually में
12:05किसी देश से compete करने के लिए नहीं बनाया गया था
12:07इंडिया की किसी दूसरे देश के साथ
12:09कोई जंग नहीं चल रही थी
12:11जिबूरी में आकर प्रेशर में आकर
12:13ISRO डेवलब करना पड़ा हो
12:15इसरो का मकसत था space technologies को
12:17डेवलब करना देश के
12:19socio-economic benefit के लिए
12:21उपर-उपर से देखकर आपको लगेगा कि इनके mission
12:23काफी similar है लेकिन traditionally देखा
12:25जाये तो NASA का शुरु से ही
12:27research, exploration और
12:29experiments करने में ज्यादा interest था
12:31उन्होंने Apollo 11 का mission इसलिए किया
12:33क्योंकि वो Soviet Union से आगे निकलना
12:35चाते थे वो पहला देश बनना
12:37चाते थे जो actually में किसी को चान पर
12:39भेजे वो दिखावे के मामले में एक
12:41ज्यादा बड़ी super power बनना चाते थे
12:43यहाँ पर एक race चलने लग रही थी
12:45दूसरी तरफ ISRO ने ऐसी चीजों में focus किया
12:47जिससे देश को भला हो जैसे कि
12:49एक ऐसा satellite network बिचाय जा सके
12:51जिससे television की broadcasting हो सके
12:53weather forecasting करी जा सके
12:55हाला कि जो बाद के missions थे ISRO के
12:57जैसे की Chandrayaan या Mangalyaan
12:59वो exploration की category में
13:01बैटते हैं लेकिन शुरुआत में
13:03ISRO का focus उन चीजों पर इतना नहीं था
13:05इसके लावा एक तीसरा कारण आ जाता है
13:07दोनों agencies का budget
13:09NASA का पूरे साल का budget है
13:11around 24 billion dollars
13:13इसे compare करो इंडिया में DOS के budget से
13:15जिसे 1.7 billion dollars
13:17मिलते हैं एक साल के
13:19और DOS के अंडर एक organization है
13:21इसरो तो इसरो को उस
13:231.7 billion dollars का कुछ portion ही मिल पाता है
13:25तो approximately देखा जा यहाँ पर
13:27NASA का budget 20 गुना ज्यादा है
13:29ISRO के comparison में
13:31अब्यसी वात है NASA के पास ज्यादा पैसे है
13:33spend करने के लिए और ambitious
13:35और और experimental missions पर
13:37इसी की मदद से वो rovers भेज़ पाते हैं
13:39Jupiter और Saturn के moons पर mission भेज़ पाते हैं
13:41asteroids तक पर भी
13:43वो spacecrafts भेज़ पाते हैं
13:45इसरो अपना ज्यादा तर budget actually में
13:47spend करता है नए technologies को
13:49develop करने में
13:51space vehicles की construction में, ground stations और
13:53जो necessary space missions हैं
13:55सिर्फ उनहीं conduct किया जाता है
13:57इतना ज्यादा पैसा बचता नहीं है
14:00तो नाचुरल सी बात है कि इतने सालों बाद
14:02NASA का infrastructure
14:04कहीं ज्यादा भैतर है इसरो के comparison में
14:06लेकिन कुछ चीज़े यहाँ पर जरूर हैं
14:08जहाँ पर इसरो NASA से आगे है
14:10जैसे की
14:12efficiency, resourcefulness
14:14और cost effectiveness
14:16for example, साल 2005 में
14:18NASA ने एक solar mission launch किया था
14:20stereo जिसकी cost पड़ी थी
14:23उस समय पर
14:24आज के दिन इसरो का आगे plan है
14:26कि एक similar सा solar mission launch किया जाएगा
14:28Aditya L1 जिसकी cost पड़ेगी
14:30सिरफ 55 million dollars
14:32वो भी आज की economy में
14:34तो imagine कर सकते हो, one tenth cost पर
14:36same mission किया जा रहा है
14:38Similarly, NASA ने दो missions plan किये हैं
14:40Venus planet पर आने वाले time में
14:42एक होगा इनका Veritas mission
14:44जिससे साल 2028 में launch किया जाएगा
14:46और एक होगा Da Vinci mission
14:48जिससे साल 2029 में launch किया जाएगा
14:50Total combined cost estimate करी गई है
14:521 billion dollars
14:54दूसरी तरफ इसरो ने अपना
14:56शुक्रियान-1 mission plan किया है, जो Venus पर जाएगा
14:58Plan के according ये
15:002025 में किया जाएगा, यानि कि
15:02पहले किया जाएगा, और cost estimate करी गई है
15:0462 million से लेकर
15:06125 million dollars के बीच में
15:08फिर से one-tenth cost पर
15:10किया जाएगा. Obviously, इसका एक और बहुत
15:12बड़ा example था हाली का Mars mission, जो
15:14एक fraction of the cost में किया गया था.
15:16आने वाले time में इसरो के तीन mission
15:18सबसे important होने वाले हैं. पहला
15:20दूसरा
15:22और तीसरा
15:24expect किया जा रहा है कि इन तीनों को
15:26अगले साल 2023 में launch किया जाएगा. इन में
15:28से सबसे important mission होगा, गगन्यान
15:30mission. क्योंकि ये देश के इतिहास
15:32में सबसे पहला manned mission
15:34होगा to space. आज तक इसरो
15:36ने कभी भी इंसानों को
15:38space में नहीं भेजाएगा. ये गगन्यान पहला इसा
15:40mission होगा जिसमें ऐसा attempt किया जाएगा.
15:42इसरो तीन लोगों के क्रू को
15:44spacecraft में भेजेगा. ये spacecraft
15:46एर्थ के बाहर चक्कर लगाएगा
15:485-7 दिन तक
15:50at a height of around 400 km above the surface.
15:52इस mission के लिए बजेट रखा गया है
15:54नौ हजार करोड से ज्यादा का
15:56और almost सारी चीजे इस mission की
15:58इंडिया में ही डेवलब करी जाएंगे.
16:00जो भी launch vehicle होगा,
16:02spacecraft होगा, life support system
16:04होगा, crew escape system होगा, सब कुछ
16:06इंडिया के अंदर डेवलब किया जा रहा है
16:08Indian organizations के दुआरा. बस एक
16:10aspect है इस mission का जिसके लिए international
16:24study training के लिए भेजा जा चुका है
16:26Russian Space Agency में. इसके लागब
16:28कुछ flight physicians और communication
16:30की जो team होगी, वो french
16:32space agency के साथ training कर रही है
16:34National Center for Space Studies
16:36यानि CNES. अगर इंडिया ये
16:38mission करने में successful होता है, तो
16:40इंडिया चौथा देश बन जाएगा दुनिया का
16:42जिसने अपनी capacity में
16:44Astronauts को lower earth
16:46orbit में भेजा. अभी तक ये सिर्फ
16:48तीन देशों ने किया है. USA, Russia
16:50और China. और जैसा मैंने बताया
16:52Rakesh Sharma अभी तक इकलोते
16:54Indian citizen है जो space में गए है. तो
16:56एक successful Gaganyaan mission का मतलब होगा कि
16:58ये भी चीज़ अब बदल जाएगा. यहाँ पर
17:00सोच रहे होंगे कलपना चावला के बारे में.
17:02कलपना चावला का जन्म actually मैं इंडिया में
17:04हुआ था करनाल में. वो Indian origin
17:06जरूर थी लेकिन Indian citizen
17:08नहीं थी जब वो space में गए थी. तो
17:10technically उन्हें American ही consider किया जा सकता है.
17:12अब Gaganyaan mission के भी तीन
17:14phases हैं. पहली जो दो phases हैं
17:16Gaganyaan-1 और Gaganyaan-2 ये दोनो
17:18unmanned missions होंगे. यानी spacecraft
17:20को space में भेजा जाएगा जिसमें कोई
17:22इंसान नहीं होंगे. Safety test करने के
17:24लिए. ये जो दो test flights हैं ये
17:26अगले साल से ही देखने को मिलेंगी हमें. और
17:28इसके बार जो final manned mission है जिसमें
17:30इंसान space में जाएगे. ये होगा
17:32साल 2024 में. इसके
17:34लावा जैसे मैंने बताया Aditya L-1
17:36एक और important mission जिसे
17:38launch किया जाएगा first quarter of
17:402023 में. ये इंडिया का
17:42पहला mission होगा जो सूरज को study
17:44करेगा. इसके लिए cost रखी गई
17:46एरांट 378 करोड रुपीज
17:48और फिर होगा इसरो का Chandrayaan-3
17:50mission जो के तीसरा mission
17:52होगा moon पर. 2019 में
17:54Chandrayaan-2 भेजा गया था जिसने
17:56land करने ही कोशिश करी थी लेकिन
17:58lander जो था उसका Vikram lander जिसका
18:00नाम था. वो malfunction कर गया था
18:02एक software glitch की वजए से. और
18:04ये lander crash कर गया था. Chandrayaan-3
18:06फिर से यही चीज एटेम्ट करेगा और
18:08एक soft landing करने ही कोशिश करेगा
18:10moon के south pole पर. इसकी लावर
18:12टाइम में आगे जायें तो कई और missions
18:14प्लैन किये गए इसरो के दुबारा. जैसे की
18:16शुक्रेयान-1 जो वीनस पर जायेगा.
18:18साल 2024 में किया जाएगा ये. और
18:20कई space agencies के साथ collaborate करके ये किया जाएगा.
18:23फिर प्लैन किया गया है कि एक
18:25lunar polar exploration mission किया जाएगा.
18:27Japanese aerospace agency के साथ
18:29collaborate करके. जिसमें साल
18:312025 में एक lander और
18:33rover भेजेंगे moon पर south pole
18:35region को explore करने के लिए. साती साथ
18:37एक Mangalyaan-2 mission भी
18:39प्लैन किया जा रहा है. Long term future में
18:42प्लैन की बात करें तो इस्रो का
18:44प्लैन है कि साल 2030 तक
18:46इंडिया का खुदगा space station हो
18:48space में. ये चीज फॉर्मर इस्रो
18:50chairman के सेवन ने announce करी थी साल
18:522019 में. यहाँ पर एक चीज
18:54तो पक्की है कि वो जो जमाना था
18:56Soviet Union और America जब एक
18:58समय पर race किया करते थे
19:01जबर्धस competition का जो जमाना था
19:03वो खतम हो चुका है अब. आज का
19:05जमाना कोई इस्रो वर्सिस नासा
19:07या इस्रो वर्सिस कोई और space agency का
19:09नहीं है. बलकि ये time है
19:11इस्रो प्लस नासा या इस्रो प्लस
19:13बाकी space agencies का. आज के दिन
19:15ज्यादतर देश एक दूसरे से
19:17लड़ाई नहीं करना चाहते, compete नहीं करना चाहते
19:19बलकि collaborate करना चाहते हैं
19:21क्योंकि साथ में मिलकर काम करने से
19:23ही जब एक दूसरे के साथ technologies
19:25शेर करी जाएंगी. पैसे बचाने के
19:27ideas शेर किये जाएंगी. मिलकर
19:29काम किया जाएगा. तभी तो हमें सही
19:31इंसानों के लिए progress देखने को
19:33मिलेगा. किसी एक या
19:35दूसरे देश के लिए नहीं. पूरी इंसानियत
19:37के लिए. और उमीद है कि जिस
19:39इंडियन ecosystem ने ISRO की growth को
19:41support किया है और scientist को
19:43empower किया है. ISRO को इस मौकाम
19:45तक पहुचाने के लिए. हम उसी तरीके
19:47से ISRO का support आने वाले
19:49टाइम में भी करते रहेंगे. उससे
19:51जो कहानी मैंने आपको वीडियो के शुरू में
19:53बताई थी. उसकी भी एक happy ending है.
19:55America और Soviet Union ने जरूर
19:57एक दूसरे से compete करके शुरुबात
19:59करी थी. लेकिन July 1975 तक
20:02America और USSR भी
20:04एक दूसरे के साथ collaborate करने लग गये थे
20:06space के मामले में.
20:18और 1975 ही वो साल
20:20बताया जाता है दोस्तों. जब
20:22ये space race खतम हुई.
20:24इन दोनों देशों ने एक दूसरे के
20:26अगेंस्ट भागना बंद किया और साथ
20:28में मिलकर ये दोड़े. वीडियो पसंद
20:30आप और वीडियो देख सकते हैं मेरे जो मैंने
20:32space के उपर बनाये थे जैसे की
20:34James Webb Space Telescope या Time Travel
20:36यहाँ पर click करके आप देख सकते हैं.
20:38बहुत-बहुत धन्यवाद.
21:00बहुत-बहुत धन्यवाद.
21:02बहुत-बहुत धन्यवाद.
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