00:00विश्व कप फाइनल में सूर्या के कैच ने बदला था मैड।
00:04भारते टीम के फिल्डिंग की होने लगी हर तरफ चर्चा।
00:09फिल्डिंग को इस मुकाम तक ले जाने में इस शक्स का है एहम योगदान।
00:15भारत के लिए खेलना चाहता था ये शक्स, लेकिन किसमत ने नहीं दिया साथ।
00:23T20 विश्व कप 2024 का फाइनल मुकाबला किसे नहीं याद होगा।
00:26और किसे नहीं याद होगा बीशवे ओवर की वो पहली गेन।
00:29स्ट्राइक पर थे साउथ अफरिका के हिटर किलर मिलर और गेनबाजी कर रहे थे हार्डिक पांडिया।
00:34ओवर की पहली ही गेन पर मिलर ने लॉंग औख पर उपर से खेल दिया।
00:38गेनद आसमान को चुम्पती हुई सीमा रिखे के उपर से जाने को बेताब थी।
00:42साउथ अफरिकी फैंस खुश हो चुके थे और हो भी क्यों ना आखिरे निर्णायक जो साबित होने जा रहा था।
00:47साउथ अफरिका पहली बार बिशु कब जीतने के लिए खेल रही थी लेकिन ये क्या? अचानक से एक फिल्डर बिजली की तेजी से गेनद की ओर लपका और उसे बाउंडरी के बाहर से मैदान में खीचलाया।
00:56पूरे अफरिकी खेमे में सन्नाटा। किसी को बिश्वास नहीं हो रहा था कि ये क्या हो गया। ये शक्स और कोई नहीं था ये थे सूरी कुमार यादो। जिनों ने ना सिर्फ कैच लपका था बलकि वो पूरा मैच था। मैच ही नहीं वो पूरा का पूरा बिशु कब ही
01:26पड़ता होगा जसके बारेने में हम बताने जा रहे हैं।
01:29आईdo आपको उस शुक्स के बारे में
01:30बतं ते हैं। उसका एक-एक किसा केayım उसका एक-एक किसा सुनाथा।
01:33क्रिकेट मेहंच खेल नहीं उसका जुनून है
01:35क्रिकेट मेहच खेल नहीं उसका जुनून है।
01:38एक लड़का क्रिकेटर बनना चाहता था।
01:41खेल नहीं जुनून था उसके लिए क्रिकेट।
01:43सोचा कोई एकाडमी जॉइन कर लूँ,
01:45क्या पता भीतर का छुपा टालेंट बाहर आ जाए।
01:47पर वहाँ लगते थे पैसे जो उस लड़के के पास थे ही नहीं।
01:50पर होसला था हर आलात से लड़ने का।
01:53पढ़ने लिखने में मेहनिती था,
01:55तो उसने बच्चों को मैस की टूशन देना शुरू कर दिया।
01:57जो कमाता था, वो एकाडमी के हवाले कर दिता था।
02:01अपना कोई शौक नहीं था उसका।
02:03एक शौक था वैसे पढ़ने का।
02:05इसे शौक की लिए वो क्रिकेट एकडमी में चोटे बच्चों के बीच चला जाता।
02:08वहाँ वो बच्चों को वो सीखा था जो उसने सीखा था।
02:11धीरे धीरे बच्चे उसकी सलाः पर अमल करने लगे।
02:14और जब वो अच्छा परफॉर्म करते तो उस लड़के के अंदर का एक मायूस कोना उन्हें कामयाब होता देखकर खिल उठता।
02:19कुछ वक्त गुझरने के बाद उस लड़के को समझ में आया कि मेरा प्यार तो क्रिकेट है।
02:23पर मुझे कामयाब होने से जादा खुशी किसी को कामयाब होते देखकर होती है।
02:27फिर कुछ सोचकर उसने फैसला किया कि मैं कोचिंग के लिए जरूरी सारी चीजें सीखुंगा।
02:31फिर उस लड़के ने कोचिंग की जरूरी मेरिट पूरी की और हैदराबाद क्रिकेट ऐसोशियेक्शन ने उसे असिस्टेंट फिल्डिंग कोच की जौब दी।
02:38असिस्टेंट ये सही पर लड़का अब कोच बन गया था। शादी की उम्र भी हो रही थी, मौके भी आये पर उस लड़के को कुछ और करना था। और उसके दरम्यान वो किसी तरह की रुकावट नहीं चाहता था।
02:48वो जानता था कि उसके दिन के 24 गंटे दूसरे खिलाडियों को निखारने में लग जाने हैं। तो शादी जैसे जिम्मदारी भरे रिस्ते के लायक वो खुद को नहीं समस्ता था। अपनी लगन और मेहनत से वो धीरे धीरे ही सही पर अपने गोल की तरह बढ़ रहा था।
03:18वहाँ उसे बहुत कुछ सीखने और समजने को मिला।
03:21फिर एक दिन ऐसा आया जब वो NCA में residence के तौर पर join हो गया।
03:25उसे NCA की payment से 3 गुना जादा के भी offer मिले पर उसे यही करना था।
03:30और फिर वही होने लगा यानि की दिन रात की मेहनत।
03:34बेस्ट फिल्डिंग के मेडल से खिलाडियों के उच्छा को बढ़ाया।
03:372017 में इंडिया 8 टीम बंगलादेश गई। उस लड़के को टीम के साथ भेजा गया।
03:41फिर एक समय ऐसा आया जब भारती क्रिकेट टीम की दो टीमे अलग-अलग दोरों पर गई थी।
03:46एक टीम का फिल्डिंग कोच उसे निवक्त किया गया।
03:48वहाँ उसकी मुलाकात राहूल द्रविड से हुई।
03:50राहूल द्रविड से उसने कहा कि मैं अपनी टीम से बात करना चाहता हूँ।
03:53द्रविड की जाज़त से उसने बोलना शुरू किया।
03:56बात खत्म हुई तो द्रविड आकर उसका कंधा थप थप आया और शाबासी दी।
04:00उस दवरान उस लड़के की इंग्लिष अच्छी नहीं थी।
04:02वो प्लेयर से मिलकर अपनी बाते पुरी तरीके से नहीं कह पाता था।
04:05वो आपस आया तो उसने अपने एक दोस्त को पकड़ा और कहा कि मैं रोज आधे गंटे किसी एक टॉपिक पर बोलूंगा।
04:11तुम बस मुझे ओब्जर्ब करके बताना कि क्या गलत कर रहा हूं क्या सही।
04:15अनलाइन वाइस चैट डूप में वो ऐसे ही घुसके अपनी इंग्लिस जारता रहता। धीरे धीरे उसने अपनी भाषा और स्पीच सुधार लिए।
04:21अब जब अगली दफा उसे इंडियन टीम का फिल्डिंग कोच निव्पत किया जा तो वो बहुत क्लियर तरीके से अपनी बात खिलाडियों को समझा सकता था।
04:27फिर आया साल 2023 भारते टीम और टीम मेनेजमेंट पर बहुत सवाल उठ रहे थे।
04:32कागज पर इस टीम की मजबूती पर किसी को शक नहीं था पर ये सब एक साथ क्लिक नहीं हो पा रहे थे।
04:38उस लड़के को लगा कुछ तो किया जाना चाहिए जिस से टीम के अलग-अलग मोतियों को एक धागे में पिरो कर जीत की माला बनाई जाए।
04:45उसने एक नया ट्रेडिशन सुरू किया बेस्ट फिल्डिंग के लिए मेडल देने का।
04:48मैदान के अंदर मैदान के बाहर एक स्वस्त प्रतियस प्रधा सुरू हुई खिलाडियों में जिसका असर उनकी पर्फॉर्मेंस में आया।
04:55मेडल सर्मनी को इंटरस्टिंग बनाने के लिए उस लड़के ने दुनिया जहां के पैतरें आजमाए।
04:59कभी स्टेडियम की स्क्रीन पर मेडल अनॉंस होता, कभी स्पाइडी कैम पर विजेता की फोटो तंगी मिलती।
05:04तो कभी स्टेडियम की रंगीन रोष्णी बताती की आज कौन जीता है।
05:08बाकी टीम भी बहुत मज्मूत और टैलेंटेड है पर उनके पास टी दिलिब जैसा कोच नहीं है जिसे टीम को बांधना आता हो।
05:14जो छोटी छोटी चीजों को इतना इंटेस्टिंग बना दे कि मैदान में ही खिलारी केच ले कर उसकी तरफ इसारा करके कहे कि मुझे मैडल दो।
05:21बेशक भारती टीम के खिलारी मेहनती और टैलेंटेड है पर इस टीम के पीछे टी दिलिब जैसे कितने लोगों का जुनून है जो इस टीम को आज उस मुकाम तक ले गया है जहां जीतना छोड़िये कोई टीम लड़ भी नहीं पार रही इनके सामने।
05:33टी दिलिब को देखकर आप एक कीचर की एहमियत समझ सकते हैं दिलिब के नाम कोई रिकॉर्ड नहीं है नाहीं वो फ़र्स क्लास का बहुत बड़ा नाम है पर दूसरों की काम्याबी से खुश होने की आदत ही उन्हें दुनिया के सभी कोचों से अलग करती है।
05:45मार्तन सिंग् डेली लाइन
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