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  • 4 years ago
हमारे यहां मरने वाले के सम्मान में यह कहने का चलन है कि मृतक की आत्मा को शांति पहुंचे, अंग्रेजी में रेस्ट इन पीस कहते हैं. लेकिन आज के भारत में मरने वाले की आत्मा से जुड़ी शांति या फिर मृत्यु की गरिमा के बनाए रखने की सलाहियत खत्म हो चुकी है. एक पूरी फौज बैठी है मौत पर मसखरी करने के लिए. यह फौज हर किस्म का बदसूरत हल्ला करके ग़म के माहौल को ज़हरीला बना देती है. यह फौज हमारे मीडिया में भी मौजूद है और #SocialMedia में भी. 8 दिसंबर को भारत की तीनों सशस्त्र सेनाओं के पहले अध्यक्ष जनरल #BipinRawat का निधन एक हेलीकॉप्टर क्रैश में हो गया. उनके साथ इस हादसे में उनकी पत्नी और सेना के 11 अन्य अधिकारी भी मारे गए.

बीते हफ्ते खबरिया चैनलों की दुनिया के बेताज बादशाह #DeepakChaurasia ने डार्क ह्यूमर या ब्लैक ह्यूमर का मुजाहिरा किया. मोटी मोटा इसका अर्थ होता है कि तब आप तनाव, ग़म या अवसाद की अवस्था में हों तब भी हंसने के लिए कुछ मौके निकल पाएं. उस गम पर भी हंस सकें. जब पूरा देश ग़मगीन था, कंधा झुका हुआ था, हौसले की जरूरत थी तब यह महत्वपूर्ण जिम्मा दीपक चौरसिया ने अपने कंधे पर थाम लिया. पूरे होशो हवास में उन्होंने जनरल बिपिन रावत को एक ब्यौड़े के अंदाज में श्रद्धांजलि देने का निर्णय किया.

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