एक बार की बात है दिल्ली के रेलवे स्टेशन के बाहर बहुत सारे भिखारी बैठा करते थे उनमे से एक का नाम था सबिता सबिता की एक बहन भी थी जिसका नाम रूपा था रूपा सातवीं कक्षा में पढ़ती थी सबिता जब पंद्रह साल की थी तभी उसके माता पिता का देहांत हो गया था जिसकी वजह से सबिता के मासूम कंधो पर अपनी बहन रूपा और अपने घर के जिम्मेदारी और अधिक पूरी कहानी पढ़ने के लिए वीडियो लिंक पे क्लिक करे...
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