अयोध्या जिले की रामनगरी के दन्त धावन कुंड आचारी पीठ के 13वे पीठाधीश्वर महन्थ विवेक आचारी बने। सन्तो महन्तों ने पट्टाभिषेक किया। दिवंगत महन्थ नारायनाचारी के उत्तराधिकारी है महन्थ विवेक आचारी जगद्गुरू राघवाचार्य ने बताया कि यह अत्यन्तं प्राचीन पीठ है यहां कई तामपत्र आज भी सुरक्षित हैं तुलसीदास जी ने इसी पीठ में रहकर रामचरित मानस की रचना की है ये अत्यन्त प्राचीन स्थान है इसी पीठ से अयोध्या के अखाड़े बसाये गए हैं।
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