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  • 5 years ago
कोरोना काल में महामारी का भय अपनी जगह है, लेकिन बड़े से लेकर बच्चे तक का स्क्रीन
टाइम बढ़ गया है। अर्थात लोग कंप्यूटर, मोबाइल और टीवी पर ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। ऐसे
में आंखों पर बुरा असर होना स्वाभाविक ही है। इसका न सिर्फ आंखों पर बल्कि मन पर भी
असर हो रहा है।


दरअसल, इस दौर में लोग कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का शिकार हो रहे हैं। इससे आंखों में थकान, ड्राइनेस जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं।

ऑनलाइन क्लासेस के चलते बच्चों का स्क्रीन टाइम भी बढ़ गया है। ऐसे में पैरेंट्‍स की
जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि नए माहौल को स्वीकार करना सभी के लिए समय की मांग भी है
और जरूरत भी। ऐसे में छोटी-छोटी सावधानियां रखकर खुद को नए वक्त के अनुरूप ढाला जा सकता है।


दोस्तो, इस खूबसूरत दुनिया को हम अपनी आंखों से ही देख पाते हैं। लेकिन, इसके लिए उनका स्वस्थ होना भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में कोई भी लापरवाही न बरतें और न सिर्फ खुद को बल्कि अपने परिजनों की आंखों का भी पूरा ध्यान रखें। आंखों की खूबसूरती को लेकर किसी ने कहा भी है- सुना है तेरी आंखों में सितारे जगमगाते हैं, इजाज़त हो तो मैं भी अपने दिल में रोशनी कर लूं...

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