फर्रुखाबाद में बाढ़ कुंआरों के ब्याह करने के अरमान पर पानी फेर रही है। कटरी के 17 गांव ऐसे हैं जहां शादियों का ग्राफ साल दर साल कम हो रहा है। लोग यहां अपनी बेटियों को ब्याहने से कन्नी काटते हैं। ऐसे में इन गांवों में कुंआरो की संख्या बढ़ती जा रही है।पिछले छह सालों में यहां किसी कुंआरे के सिर पर विवाह का मौर नहीं बंधा। घर के बढ़े- बूढ़े लड़कियों के तो संबंध तय कर आते हैं पर कोई अपनी लड़की का संबंध यहां जोड़ने नहीं आता। वीओ - कमालगंज ,अमृतपुर शमसाबाद ब्लाक के कटरी के गांव समैचीपुर, सुतिहार, गंगलई, साधो सराय, हरसिंगपुर सहित गांव ऐसे हैं जो बाढ़ के कारण हर साल तबाह होते हैं और बाढ़ के बाद हर फिर बसते हैं।उजड़ना और बसना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है।बरबादी का यह आलम कुंआरों के अरमानों पर पानी फेर रहा हैं। गांव वालों का दर्द सुनने के बाद लड़की वाले अपनी बेटी का रिश्ता करने से तौबा कर लेते हैं। यहां तो बाढ़ आने से पहले जिंदगी बचाने के लिए गांव खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। ऐसे में कोई यहां रिश्ता लेकर आ भी जाता है तो सारी कथा सुनकर वापस नहीं लौटता।
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