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  • 6 years ago
त्रेता और द्वापर के भगवान विराजे हैं यहां एक साथ

कोरोना ने 445 सालों की परंपरा को तोड दिया है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के नजदीक बगरू में यह परंपरा टूटी है, पहली बार यहां जुगलजी महाराज विहार नहीं कर पाए है। कोरोना के चलते किए गए लॉकडाउन में जुगलजी महाराज भी विहार के लिए बाहर नहीं निकले। इसके चलते वर्षों पुराना मेला भी नहीं भर पाया। जिस मेले का ग्रामीणों के साथ लाखों लोगों को सालभर से इंतजार रहता है, वे जुगलजी महाराज का जलेबी का भोग भी नहीं लगा पाए। इसी भोग के चलते आस—पास के गांवों तक जलेबी की महक फैलती थी, इस बार कोरोना के चलते कुछ नहीं हो पाया।

मंदिर के पुजारी मोहन पंडा ने बताया कि संवत 1632 में मुगलों के शासन से बचते—बचाते मथुरा—वृंदावन से श्रीकृष्ण भगवान जुगल रूप में बगरू आए और एक बाग में विराजमान हुए। कुछ सालों बाद चैत्र पूर्णिमा को वर्तमान मंदिर की जगह एक मंदिर तैयार किया गया, जहां जुगलजी महाराज को विराजमान कराया गया। तभी से यहां चैत्र पूर्णिमा को तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता आया है। तीन दिन तक लाखों लोग बगरू में रहते थे। इस बार लॉकडाउन के चलते जुगलजी महाराज मंदिर से बाहर ही नहीं निकल पाए, जिसके चलते न विहार की परंपरा निभाई गई और ना ही मेला भर पाया।

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