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  • 5 years ago
भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में भारत सरकार स्वास्थ्य उपकरणों को जुटाने में लगी है। कोरोना महामारी में वेंटिलेटर एक वरदान साबित हो रहा है क्योंकि 100 में से केवल 5 फीसदी या इससे कम लोगों को वेटिंलेटर की जरुरत पड़ती है। सुरक्षा की दृष्टि से स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को 30,000 वेंटिलेटर तैयार करने का ऑर्डर दिया गया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल निर्माताओं को भी वेंटिलेटर्स बनाने के लिए कहा गया है।
दरअसल वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है जो किसी मरीज़ की सांस लेने में मदद करती है, ये फेफड़ों में ऑक्सीजन डालती है और कार्बन डाईऑक्साइड निकालती है।वेंटिलेटर को लाइफ सेविंग मशीन भी कहा जाता है क्योंकि ये उस वक़्त इस्तेमाल की जाती है जब मरीज़ के फेफड़े काम करना बहुत कम कर देते हैं। वेंटिलेटर मशीन में एक ट्यूब जुड़ी होती है जिसे मरीज़ के मुंह, नाक या गले में छोटे से कट के ज़रिए शरीर में डाला जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोविड19 के 80 प्रतिशत मरीज़ बिना अस्पताल में इलाज़ के ठीक हो जाते हैं। लेकिन, छह मरीज़ों में से एक गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं और उन्हें सांस लेने में दिक्कत आती है।

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