आपने कभी महसूस किया है कि दुख की सप्लाई कहां से होती है! कौन है, जो रात-दिन हमारी ओर दुख धकेले जा रहा है. 'जीवन संवाद- जीवन संवाद' के सफर में आपकी प्रतिक्रिया, ईमेल और संदेश को अगर हम एक छोटा सर्वे मान लें, तो इनका एक ही केंद्र है मन. इस पर हमारा नियंत्रण जैसे-जैसे कम होता जाता है, दुख का कारखाना तेजी से हमारी ओर दुख फेंकता जाता है. यह कुछ-कुछ वैसे ही है, जैसे किसी फैक्ट्री में काम होता है. सबकुछ उतना ही फॉर्मूला बंद है. एकदम सांचे में ढला हुआ, मुझे लगता है कि हमारा मन, दिमाग इतने वैज्ञानिक तरीके से काम करते हैं कि वह विज्ञान के साथ किसी भी समय आंख मिलाकर बात कर सकते हैं.
Comments