सारनाथ संग्रहालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का प्राचीनतम स्थल संग्रहालय है। सारनाथ संग्रहालय की स्थापना सन् 1904 ई. में हुई थी। पुरावस्तुओं को रखने, प्रदर्शित करने और उनका अध्ययन करने के लिए यह भवन 1910 में बनकर तैयार हुआ। यह भवन योजना में आधे मठ के रूप में है। इसमें ईसा से तीसरी शताब्दी पूर्व से 12वीं शताब्दी तक की पुरातन वस्तुओं का भण्डार है। सारनाथ में बौद्ध मूर्तियों का विस्तृत संग्रह है। यहाँ पाँच दीर्घाएं और दो बरामदे हैं। दीर्घाओं का उनमें रखी गई वस्तुओं के आधार पर नामकरण किया गया है, सबसे उत्तर में स्थित दीर्घा तथागत दीर्घा है जबकि बाद वाली त्रिरत्न दीर्घा है। मुख्य कक्ष शाक्यसिंह दीर्घा के नाम से जाना जाता है और दक्षिण में इसकी आसन्न दीर्घा को त्रिमूर्ति नाम दिया गया है। सबसे दक्षिण में आशुतोष दीर्घा है, उत्तरी और दक्षिणी ओर के बरामदे को क्रमश: वास्तुमंडन और शिल्परत्न नाम दिया गया है। संग्रहालय में मुख्य कक्ष से होकर प्रवेश किया जाता है। शाक्यसिंह दीर्घा संग्रहालय की सर्वाधिक मूल्यवान संग्रहों को प्रदर्शित करती है। इस दीर्घा के केन्द्र में मौर्य स्तंभ का सिंह स्तंभशीर्ष मौजूद है जो भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बन गया है।
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