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मैं हूॅ उर्दू ज़बाॅ, मैं हूॅ उर्दू ज़बाॅ

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‘परिवर्तन’ के संस्थापक अध्यक्ष जनाब ‘बेखुद ग़ाज़ीपुरी’ आज किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं, इनका मानना है कि ‘रफ्ता-रफ्ता हमीं से जुदा हो गये, संग जितने तराशे ख़ोदा हो गये । जबसे सोहबत हमारी मयस्सर हुई, आप खुद सोचिये, क्या थे, क्या हो गये ।’ हिन्दी-उर्दू की साहित्य-सेवी संस्था परिवर्तन को न केवल Share, Follow और Subscribe करें बल्कि इसे Comments करके हमें उपकृत भी करें ।

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